अक्षय तृतीया2025 /सर्वोदय : वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। यह पवित्र दिन मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना, दान-पुण्य और शुभ कार्यों के लिए जाना जाता है। इस दिन किए गए कार्यों से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेष मान्यता है कि यदि अक्षय तृतीया पर श्रीयंत्र की स्थापना की जाए, तो मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
श्रीयंत्र की स्थापना क्यों है महत्वपूर्ण?
श्रीयंत्र को समृद्धि, सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। यह न केवल आर्थिक समस्याओं से छुटकारा दिलाता है, बल्कि घर और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है। श्रीयंत्र की पूजा और नियमित दर्शन से आत्मविश्वास बढ़ता है और मन की नकारात्मकता समाप्त होती है।
अक्षय तृतीया पर श्रीयंत्र की स्थापना की विधि
- स्थान का चयन: श्रीयंत्र को घर के मंदिर में या तिजोरी के पास स्थापित करें। यह स्थान शुद्ध और पवित्र होना चाहिए।
- शुद्धिकरण: श्रीयंत्र को कच्चे दूध और गंगाजल से अभिषेक कर स्वच्छ करें।
- सजावट: श्रीयंत्र को लाल या पीले कपड़े पर रखें और ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिद्ध लक्ष्म्यै नम:’ मंत्र का जाप करते हुए उसकी स्थापना करें।
- पूजन सामग्री: दीपक जलाएं, चावल और फूल अर्पित करें। प्रतिदिन श्रीयंत्र की पूजा करें और सफाई का ध्यान रखें।
श्रीयंत्र के लाभ
- आर्थिक समस्याओं से मुक्ति।
- व्यापार और करियर में उन्नति।
- मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार।
- पारिवारिक कलह समाप्त और सुख-शांति का वास।
- जीवन में तरक्की और नए अवसर प्राप्त होना।
श्रीयंत्र से जुड़े सुझाव
- श्रीयंत्र को स्वच्छ और पवित्र स्थान पर ही रखें।
- नियमित रूप से इसकी पूजा करें और मन से मां लक्ष्मी का ध्यान करें।



