न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक और झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके शिबू सोरेन का सोमवार सुबह दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर से पूरे राज्य में शोक की लहर है।
गंगाराम अस्पताल ने बताया कि शिबू सोरेन 19 जून 2025 से नेफ्रोलॉजी विभाग में भर्ती थे और डॉ. ए.के. भल्ला की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था। अस्पताल के बयान के अनुसार, “लगातार चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद आज सुबह 8:48 पर उनका निधन हो गया।”
झारखंड सरकार ने 4 अगस्त से 6 अगस्त तक राज्य में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। साथ ही, 4 और 5 अगस्त को सभी सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे।
झारखंड के मुख्यमंत्री और शिबू सोरेन के बेटे हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए लिखा:”आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं। आज मैं शून्य हो गया हूं।“
आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं।
आज मैं शून्य हो गया हूँ…
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) August 4, 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर शिबू सोरेन के निधन पर दुख जताया और कहा:“शिबू सोरेन जमीनी नेता थे जिन्होंने आदिवासियों, गरीबों और वंचितों के सशक्तिकरण के लिए जीवन भर कार्य किया। उनकी कमी हमेशा खलेगी।”
Shri Shibu Soren Ji was a grassroots leader who rose through the ranks of public life with unwavering dedication to the people. He was particularly passionate about empowering tribal communities, the poor and downtrodden. Pained by his passing away. My thoughts are with his…
— Narendra Modi (@narendramodi) August 4, 2025
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा:“शिबू सोरेन का जनजातीय समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।”
शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन
- झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता
- झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रहे: 2005, 2008, 2009
- 8 बार लोकसभा सांसद चुने गए
- केंद्र में 3 बार कोयला मंत्री रहे
- 1977 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, 1980 से लगातार दुमका से चुने जाते रहे
- वर्तमान में राज्यसभा सांसद थे
“गुरुजी” के नाम से मशहूर शिबू सोरेन झारखंड के जनजातीय समाज की आवाज रहे। उन्होंने अलग झारखंड राज्य के गठन में ऐतिहासिक भूमिका निभाई और आदिवासियों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।



