न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने उद्यमियों के लिए एक बड़ी राहत का ऐलान किया है। सरकार ने “उत्तर प्रदेश सुगम्य व्यापार (प्रावधानों का संशोधन) अध्यादेश-2025” जारी किया है, जिसके तहत नियमों के उल्लंघन पर कारावास की सजा को समाप्त कर केवल जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
प्रमुख सचिव (विधायी) जेपी सिंह ने शुक्रवार को इस अध्यादेश को जारी किया। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य राज्य में व्यवसाय करने में आसानी (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना और उद्यमियों पर कानूनी बोझ घटाना है।
अब जेल नहीं, सिर्फ जुर्माना देना होगा
संशोधित अध्यादेश के अनुसार, अब कई अधिनियमों में जेल की सजा खत्म कर मौद्रिक दंड (Penalty) का प्रावधान किया गया है।
इनमें प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं-
उत्तर प्रदेश गन्ना (आपूर्ति एवं क्रय का विनियमन) अधिनियम
छह माह की सजा समाप्त, अब अधिकतम ₹2 लाख जुर्माना
उत्तर प्रदेश सिनेमा (विनियमन) अधिनियम, 1955
एक माह की सजा समाप्त, जुर्माना आबादी के अनुसार: 5 लाख तक की आबादी पर ₹1 लाख, 10 लाख से अधिक आबादी पर ₹5 लाख
उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम-1959
कारावास की सजा हटाई गई, जुर्माना आबादी आधारित रहेगा
उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत अधिनियम
कारावास समाप्त, जुर्माना ₹20,000 से बढ़ाकर ₹2 लाख
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उत्तर प्रदेश मादक पान (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम
अब केवल ₹75,000 तक का जुर्माना
उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम
कारावास समाप्त, जुर्माना ₹25,000 तक
उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम
छह माह की सजा हटाई गई, जुर्माना ₹1,000 से ₹10,000 तक
जमीन और जल से जुड़े प्रावधानों में भी संशोधन
राजस्व संहिता में भ्रामक सूचना देने पर ₹2 लाख तक का जुर्माना। भू-जल प्रबंधन अधिनियम, 2019 में पहली बार ₹5 लाख और दूसरी बार ₹10 लाख तक का जुर्माना। अग्निशमन और आपात सेवा अधिनियम में अब 3 माह की सजा के साथ ₹75,000 का जुर्माना।
हर तीन साल में 10% बढ़ेगा जुर्माना
अध्यादेश में यह भी व्यवस्था की गई है कि “जुर्माने की राशि हर तीन वर्ष में 10 प्रतिशत बढ़ाई जाएगी।” सरकार का कहना है कि यह प्रावधान समय के साथ आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप होगा और इसका उद्देश्य निष्पक्ष दंड व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
राज्य सरकार का यह कदम ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इससे व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन, उद्योगों में निवेश और कानूनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।



