Saturday, March 28, 2026

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बेईमानी न पहले थी, न अब: चुनाव आयोग का अखिलेश यादव पर पलटवार, ‘भेड़िया आया’ कहानी की दिलाई याद

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश में एसआईआर (Special Intensive Revision) के तहत करीब तीन करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग और योगी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मतदाता सूची में नाम जोड़े और हटाए जा रहे हैं।

अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए चुनाव आयोग से सवाल किया था कि “बेईमानी पहले हो रही थी या अब हो रही है?” इस पर अब निर्वाचन आयोग ने सख्त जवाब देते हुए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि न तो पहले कोई बेईमानी हो रही थी और न ही अब हो रही है। साथ ही आयोग ने अखिलेश यादव को इशारों में ‘भेड़िया आया’ वाली कहानी की याद भी दिलाई।

दरअसल, ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद सामने आया कि लगभग तीन करोड़ नाम सूची से हटाए गए हैं। समाजवादी पार्टी का कहना था कि पहले मुख्यमंत्री ने चार करोड़ नाम कटने की बात कही थी, फिर आयोग की सक्रियता के बाद करीब एक करोड़ नाम दोबारा जोड़ दिए गए। पार्टी ने सवाल उठाया कि ये नाम अचानक कहां से आए और क्या यह चयनात्मक प्रक्रिया है।

इसके जवाब में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी कर कहा कि निर्वाचन आयोग पहले भी सक्रिय था, आज भी है और आगे भी रहेगा। उन्होंने बताया कि नवंबर के दूसरे सप्ताह में राजनीतिक दलों के साथ हुई बैठक में एसआईआर की समय-सीमा बढ़ाने की मांग सभी दलों ने की थी।

CEO ने स्पष्ट किया कि 12 नवंबर को मीडिया इंटरव्यू में ही बता दिया गया था कि लगभग 2.97 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से हटने वाले हैं, इसलिए अतिरिक्त 15 दिन का समय लिया गया। इस दौरान राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स को उन मतदाताओं की सूची दी गई जिनके नाम हटाए जा रहे थे।

इस प्रक्रिया के दौरान 8 से 9 लाख नए नाम ड्राफ्ट सूची में जोड़े गए, और जब 26 दिसंबर को एसआईआर पूरा हुआ, तब 27 अक्टूबर 2025 की मतदाता सूची की तुलना में 6 जनवरी 2026 की ड्राफ्ट सूची में 2.8876 करोड़ नाम ही कम पाए गए

निर्वाचन आयोग ने दो टूक कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में कोई बेईमानी नहीं हुई

इसके साथ ही आयोग ने प्रसिद्ध Aesop की कहानी ‘The Boy Who Cried Wolf’ का जिक्र करते हुए अप्रत्यक्ष रूप से चेतावनी दी कि बार-बार झूठे आरोप लगाने से एक समय ऐसा आता है जब सच भी भरोसे के लायक नहीं रह जाता।

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