चेन्नई/सर्वोदय:- तमिलनाडु में राजनीतिक हलकों में उस समय उथल-पुथल मच गई जब डीएमके (DMK) के एक पदाधिकारी की पत्नी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसका पति न सिर्फ उसके साथ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना करता था, बल्कि वह युवतियों को राजनेताओं के पास भेजने का काम भी करता था। पीड़िता ने खुलासा किया कि आरोपी उसे और अन्य युवतियों को जबरन नेताओं के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करता था।
पीड़िता ने बताया कि उसके पति ने धमकी दी थी कि यदि उसने पुलिस से संपर्क किया तो वह उसके परिवार को जला देगा। गंभीर आरोप लगाते हुए महिला ने कहा, “वह मुझे कार में बुरी तरह प्रताड़ित करता था और उन पुरुषों की ओर इशारा करके कहता था कि मुझे उनके साथ सोना होगा। मैंने जहर खाकर आत्महत्या करने की भी कोशिश की थी।”
राजनीतिक संबंधों का आरोप
महिला के अनुसार, उसका पति देइवासेयाल डीएमके की युवा शाखा का उप सचिव है और राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री अंबिल महेश पोय्यामोझी के साथ भी उसके संबंध हैं। पीड़िता का कहना है कि उसके पति का नेटवर्क इतना मजबूत है कि उसे पुलिस से किसी भी कार्रवाई का डर नहीं है। उसने आरोप लगाया कि पुलिस ने शुरुआती शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में टालमटोल की, क्योंकि आरोपी के सत्ताधारी पार्टी से करीबी संबंध हैं।
एआईएडीएमके का विरोध प्रदर्शन
इस मामले ने राजनीतिक रंग तब लिया जब मुख्य विपक्षी पार्टी एआईएडीएमके (AIADMK) ने इसे सार्वजनिक किया और डीएमके सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने कहा कि पुलिस ने केवल तभी कार्रवाई की जब एआईएडीएमके विधायक एस. रवि ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने इस मामले की तुलना 2019 के पोलाची यौन शोषण कांड से करते हुए डीएमके सरकार को आड़े हाथों लिया।
पलानीस्वामी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “डीएमके अक्सर पोलाची का जिक्र करती है, लेकिन अरक्कोणम इसका जीवंत उदाहरण है कि कैसे कानून और व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। क्या मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की सरकार इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करेगी?”
डीएमके की प्रतिक्रिया
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए डीएमके ने कहा कि कानून अपना काम करेगा और पुलिस जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगी। पार्टी प्रवक्ता ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने के बाद संगठनात्मक स्तर पर भी उचित निर्णय लिया जाएगा।
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