Wednesday, March 25, 2026

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मुसलमानों को गाली देने से हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा,धीरेंद्र शास्त्री ने सनातन समाज में आत्मसुधार पर दिया जोर

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदू समाज को आत्ममंथन और सुधार का संदेश दिया है। उत्तर प्रदेश के बांदा में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि किसी समुदाय को गाली देने या निशाना बनाने से भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बन सकता।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदू समाज को पहले अपनी आंतरिक कुरीतियों और कमजोरियों को दूर करना होगा, तभी समाज में एकता, शांति और सौहार्द स्थापित हो सकेगा।

बांदा में धार्मिक कार्यक्रम के दौरान दिया संदेश

दिव्य हनुमंत कथा के समापन के करीब दस दिन बाद धीरेंद्र शास्त्री शुक्रवार को एक बार फिर बांदा पहुंचे। वे खुरहंड स्टेशन क्षेत्र में सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी के आवास पर आयोजित सुंदरकांड और हनुमान चालीसा पाठ कार्यक्रम में शामिल हुए।

इस दौरान उन्होंने कहा- “हिंदू मेरी एक बात नोट कर लें, मुसलमानों को गालियां देकर हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा। हिंदुओं को अपनी कुरीतियां सुधारनी होंगी। सनातन में जो कमियां हैं, उन्हें दूर करना होगा।”

जात-पात खत्म करने की अपील

धीरेंद्र शास्त्री ने समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि“भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का एक ही उपाय है—जात-पात की विदाई। हम सब हिंदू भाई-भाई हैं।”

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उनके मुताबिक, जब तक समाज अंदर से मजबूत और एकजुट नहीं होगा, तब तक किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकता।

कानून और व्यवस्था पर टिप्पणी

अपने संबोधन में उन्होंने पारिवारिक कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि “हमारे यहां तो 20–25 बार पेशी होने के बाद तलाक होता है। इसमें कोई बुराई नहीं है। नियम-कायदों में रहेंगे तो फायदे में रहेंगे।” उन्होंने इसे व्यवस्था और अनुशासन से जोड़ते हुए समाज के लिए सकारात्मक बताया।

आस्था पर दिया संदेश

धीरेंद्र शास्त्री ने आस्था और विश्वास को लेकर भी श्रद्धालुओं को संदेश दिया। उन्होंने कहा- “हमारा काम है दर पर जाना, उनका काम है बिगड़ी बनाना और परमात्मा का काम है सब कुछ संभालना। अगर भगवान पर भरोसा रखोगे, तो वह कभी भरोसा नहीं तोड़ेगा।” उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि आस्था में स्पष्टता और एकनिष्ठता जरूरी है।

क्या संदेश देना चाहते हैं शास्त्री?

धीरेंद्र शास्त्री के बयान को समाज में आत्मसुधार,आंतरिक एकता,और सामाजिक समरसता पर जोर देने के रूप में देखा जा रहा है।

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