Thursday, February 12, 2026

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कफ सिरप रैकेट में बड़ा खुलासा: ईडी का दावा, 700 से ज्यादा फर्जी कंपनियां बनाकर अरबों की कमाई

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश में अब तक का सबसे बड़ा कफ सिरप फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की यूपी, गुजरात और झारखंड में 40 घंटे से अधिक चली छापेमारी के बाद काली कमाई के पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ है। ईडी के अनुसार, करीब 220 लोगों के नाम पर 700 से ज्यादा फर्जी फर्में खड़ी की गईं, जिनके जरिए अरबों रुपये का अवैध कारोबार किया गया।

जांच में सामने आया है कि इनमें से अधिकांश फर्में सिर्फ कागजों तक ही सीमित थीं। फर्मों में दर्शाए गए कई संचालक और अधिकृत व्यक्ति भी केवल दस्तावेजों में ही मौजूद पाए गए। ईडी सूत्रों का कहना है कि अभी और भी फर्जी कंपनियों से जुड़े अहम सबूत जुटाए जा रहे हैं। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

तीन राज्यों में 25 से अधिक ठिकानों पर की गई कार्रवाई में जिस स्तर का फर्जीवाड़ा उजागर हुआ, उसने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है। ईडी अधिकारियों का कहना है कि यूपी में इस तरह का संगठित फर्जीवाड़ा पहली बार सामने आया है। जांच के दौरान यह भी पता चला है कि फेंसेडिल सिरप बनाने वाली एक कंपनी के कई अधिकारियों को इस अवैध कारोबार की जानकारी थी, बावजूद इसके उन्होंने आंखें मूंदे रखीं। एसटीएफ के एएसपी लाल प्रताप सिंह पहले ही संकेत दे चुके थे कि दवा कंपनी के कई अधिकारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

ईडी की एंट्री के बाद कसे शिकंजे

एसटीएफ की जांच पूरी होने के बाद भी मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल, पूर्व सांसद के करीबी आलोक सिंह और अमित टाटा खुद को सुरक्षित मान रहे थे। एसटीएफ द्वारा गिरफ्तारी के बाद भी कोर्ट में उनका रवैया बेफिक्र नजर आया। लेकिन जैसे ही ईडी ने इन तीनों के ठिकानों पर छापेमारी कर सबूत जुटाने शुरू किए, आरोपियों में हड़कंप मच गया।

संदिग्ध बैंक लेन-देन पर नजर, और नाम आने की संभावना

ईडी सूत्रों के मुताबिक दुबई में छिपे मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के साथ-साथ आलोक सिंह, अमित टाटा और शुभम के पिता भोला प्रसाद जायसवाल के बैंक खातों में बड़े और संदिग्ध लेन-देन सामने आए हैं। कई ट्रांजैक्शन का पूरा विवरण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। फर्जी फर्मों के नाम से खोले गए खातों में भी ऐसे लेन-देन मिले हैं, जिनकी कड़ियां अभी जुड़नी बाकी हैं।

रांची और धनबाद की कुछ फर्मों के जरिए भी रकम के आदान-प्रदान के सबूत मिले हैं। ईडी अब जीएसटी विभाग से इन फर्मों की पूरी सूची हासिल करने की तैयारी में है, जिससे जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है। एजेंसी का दावा है कि आने वाले दिनों में कई नए नाम और नई फर्जी कंपनियां सामने आ सकती हैं।

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