शंकराचार्य से कागज मांगे जाने पर कांग्रेस का हमला, बोली– “नतमस्तक न होने की दी जा रही सजा”

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुई कथित प्रशासनिक कार्रवाई और उन्हें जारी किए गए नोटिस को लेकर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि जिस तरह पहले सरकार मुसलमानों से नागरिकता से जुड़े दस्तावेज मांगती थी, अब उसी तरह शंकराचार्य से भी पहचान और पद के प्रमाण मांगे जा रहे हैं।

कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि किसी मुख्यमंत्री या प्रशासन को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि शंकराचार्य कौन है और कौन नहीं। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य की परंपरा गुरु-शिष्य परंपरा के तहत तय होती है, न कि सरकारी नोटिस से।

“आधी रात में नोटिस भेजकर सवाल पूछे जा रहे हैं”

पवन खेड़ा ने संवाददाताओं से कहा कि माघ मेले में मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान से रोके जाने के विवाद के बाद मेला प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी कर पूछा कि वे स्वयं को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य किस आधार पर बता रहे हैं। उन्होंने इसे सनातन परंपरा में हस्तक्षेप बताया।

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खेड़ा ने आरोप लगाया कि जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरकार से सवाल नहीं पूछ रहे थे, तब तक उन्हें शंकराचार्य माना जा रहा था। उन्होंने कहा, “जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके सामने नतमस्तक हुए, तब वे शंकराचार्य थे। जब उन्होंने गोमांस और अधूरे मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा पर सवाल उठाए, तब तक भी वे शंकराचार्य थे। लेकिन अब जब वे सत्ता के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं, तो उनसे कागज मांगे जा रहे हैं।”

“पहले मुसलमानों से, अब शंकराचार्य से कागज”

कांग्रेस नेता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा पहले मुसलमानों से ‘कागज दिखाओ’ कहती थी और अब हालात ऐसे हो गए हैं कि शंकराचार्य से भी प्रमाण मांगे जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

पवन खेड़ा ने 1954 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मठों और धार्मिक संस्थानों के संचालन में किसी भी सरकार या प्रशासन को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी नोटिस कानून का उल्लंघन है।

कांग्रेस ने इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और कहा कि देश सब कुछ देख रहा है और आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिलेगा।

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