न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- लोक आस्था का चार दिवसीय छठ महापर्व आज से नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है। शनिवार को श्रद्धालुओं ने नदियों, तालाबों और पोखरों में स्नान कर अंतःकरण की शुद्धि के साथ व्रत का संकल्प लिया।इस दिन व्रती महिलाएं और पुरुष अरवा चावल, लौकी और चने की दाल का सात्विक भोजन ग्रहण कर उपवास की शुरुआत करते हैं।
कल मनाया जाएगा खरना, जानें व्रत का शुभ मुहूर्त
छठ का दूसरा दिन “लोहंडा” या “खरना” के नाम से जाना जाता है। यह पर्व रविवार (26 अक्टूबर 2025) को मनाया जाएगा। इस दिन व्रती निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को सूर्यास्त के समय भगवान सूर्य की पूजा के बाद दूध-गुड़ से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण करते हैं।
शुभ मुहूर्त:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:47 से 5:38 तक
- अभिजीत मुहूर्त: दिन 11:42 से 12:27 तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:41 से 6:06 तक
36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं महिलाएं
छठ पूजा की विशेषता यह है कि इसमें व्रती लगभग 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखते हैं। यह व्रत परिवार की सुख- समृद्धि, संतान की दीर्घायु और कष्टों के निवारण के लिए किया जाता है। इस पूजा में किसी पुरोहित की आवश्यकता नहीं होती, व्रती स्वयं पूजा और अर्घ्य प्रदान करते हैं।
तीसरे दिन देंगे अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य
छठ महापर्व के तीसरे दिन, व्रतधारी अस्ताचलगामी सूर्य (डूबते सूर्य) को जल अर्पित करते हैं। नदी या तालाब में खड़े होकर व्रती फल, नारियल, गन्ना और ठेकुआ जैसे प्रसाद से सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं।
चौथे दिन उदीयमान सूर्य को दूसरा अर्घ्य
चौथे और अंतिम दिन, व्रती उगते सूर्य को दूसरा अर्घ्य देकर व्रत का समापन करते हैं। इस अर्घ्य के बाद ही श्रद्धालु अन्न और जल ग्रहण करते हैं, जिससे 36 घंटे का कठिन व्रत पूर्ण होता है। यह पर्व शुद्धता, श्रद्धा और आत्मसंयम का प्रतीक माना जाता है।



