न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश के नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के मिनी पाकिस्तान वाले बयान पर निशाना साधा। सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि मेरठ में एक कथा चल रही है। जो अपने आपको संत कहते हैं। वे मेरठ में आकर कहते हैं कि मिनी पाकिस्तान में आ गए हैं। पहले तो उनको दिखता नहीं है। वो खुद कहते हैं बचपन से मेरी आंखें नहीं हैं। ऐसे में एक संत ऐसे हैं जिनकी आंखें नहीं हैं। सोचिए उनके कितने पाप होंगे। जनता को उनसे ज्ञान लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि संत की न कोई जाति होती है, न कोई धर्म होता है।
क्या कहा चंद्रशेखर आजाद ने?
बरेली में हुए प्रबुद्धजन सम्मेलन के दौरान नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने मेरठ में चल रही रामकथा और उसमें दिए गए “मिनी पाकिस्तान” बयान को लेकर जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर सीधा हमला बोला।
उन्होंने कहा:”मेरठ में एक कथा चल रही है। जो अपने आपको संत कहते हैं, वो कहते हैं कि ‘मिनी पाकिस्तान’ में आ गए हैं। पहले तो उनको दिखता नहीं है, वो खुद कहते हैं कि उनकी आंखें नहीं हैं। सोचिए ऐसे संत के कितने पाप होंगे, जिसकी आंखें नहीं हैं।”
“संत न किसी जाति के होते हैं, न किसी धर्म के”
चंद्रशेखर ने कहा कि संतों को जोड़ने का काम करना चाहिए, लेकिन बंटवारे और नफरत का प्रचार करने वाले खुद को संत कहते हैं, यह समाज और धर्म दोनों के लिए खतरनाक है।”जनता को उनसे ज्ञान लेना पड़ रहा है, जो खुद दृष्टिहीन हैं। संतों को जोड़ने का काम करना चाहिए, तोड़ने का नहीं।”
संविधान और सामाजिक न्याय की बात
प्रबुद्धजन सम्मेलन में चंद्रशेखर आजाद ने यह भी कहा कि:संविधान पर खतरा मंडरा रहा है,सरकारी विभागों का निजीकरण तेज़ी से हो रहा है, नौकरियां खत्म की जा रही हैं, साथ ही जातिगत जनगणना की मांग फिर दोहराई|उन्होंने कहा कि “1931 के बाद से जातिगत जनगणना नहीं हुई है। मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू होनी चाहिए। आर्थिक गणना भी साथ में की जाए।”
नगीना सांसद ने कहा कि ईवीएम से लंबे समय से चुनाव हो रहे हैं। जनता का भरोसा कम हो रहा है। बैलेट पेपर से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों पर कुदरत की मार है। न जमीन बची न फसल, फिर छुट्टा पशुओं ने फसल को बर्बाद किया। गुलदार और तेंदुओं की वजह से किसान खेत में नहीं जा पा रहा है। इन सरकारों को गरीबों के खून से सनी दीवारें नहीं दिखाई देती है। चारों तरफ से किसानों की आफत आ गई। यूरिया की व्यवस्था भी सरकार नहीं करा पा रही है।



