बिहार चुनाव 2025: राजद के गठबंधन में कांग्रेस की हार, महागठबंधन में शुरू हुआ ब्लेम गेम

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद महागठबंधन के दो मुख्य सहयोगी, आरजेडी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान की बैठक बुलाई गई, जिसमें पार्टी के कई नेता इस विचार पर जोर दे रहे थे कि शायद अकेले चुनाव लड़ना बेहतर होता। कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान ने कहा कि अधिकांश उम्मीदवारों का मानना है कि अगर राजद के साथ गठबंधन नहीं किया होता, तो पार्टी का प्रदर्शन बेहतर होता। अब भविष्य की रणनीति तय करना पार्टी आलाकमान की जिम्मेदारी है।

कांग्रेस ने इस चुनाव में कुल 61 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सिर्फ 6 सीटों पर जीत दर्ज की। कदवा विधानसभा सीट से शकील अहमद को हार का सामना करना पड़ा, जहां उन्हें जेडीयू के दुलाल चंद्र गोस्वामी ने 18 हजार वोटों से हराया। 2024 के लोकसभा चुनाव में कटिहार से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर की हार भी इसी रणनीतिक कमजोरी को दर्शाती है।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, एनडीए ने चुनाव के दौरान ‘जंगल राज’ का मुद्दा जोर-शोर से उठाया, जिसे आरजेडी के शासनकाल की कथित अराजकता के रूप में पेश किया गया। इससे गठबंधन सहयोगियों पर नकारात्मक असर पड़ा। इसके अलावा, आरजेडी का उदय 1990 के मंडल मंथन के बाद हुआ था, जिससे ऊंची जातियों का कुछ नाराज होना और कांग्रेस के पारंपरिक समर्थकों का भाजपा की ओर जाना भी हार की वजह बना। राजद को पिछली बार 75 सीटें मिली थीं, जबकि इस बार सिर्फ 25 सीटों पर जीत मिली।

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राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कांग्रेस को उसकी असली स्थिति दिखाने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “कांग्रेस को जो वोट मिले हैं, वे राजद की बदौलत हैं। अगर कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ना चाहे, तो वह कर सकती है, लेकिन उसकी वास्तविक स्थिति सामने आएगी।” मंडल ने यह भी याद दिलाया कि 2020 में कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की कोशिश की थी, लेकिन सिर्फ 19 सीटें जीत पाई।

इसके अलावा, गठबंधन सहयोगियों के बीच सीट बंटवारे में असमंजस भी साफ देखा गया। दर्जनों सीटों पर राजद, कांग्रेस और वाम दलों के बीच ‘फ्रेंडली फाइट’ हुई, जिसका फायदा भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए को मिला। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा, “कांग्रेस और राजद हमेशा ही लड़ते रहे हैं। इनके गठबंधन का न तो कोई ठोस वैचारिक आधार है और न ही जनता के मुद्दों के प्रति कोई साझा प्रतिबद्धता। यह दरार और बढ़ेगी।”

हालांकि, आगामी 18वीं विधानसभा के उद्घाटन सत्र से पहले महागठबंधन के सहयोगियों ने एकता का दिखावा करने पर सहमति जताई। शनिवार को बुलाई गई बैठक में सभी गठबंधन सहयोगियों ने सर्वसम्मति से राजद के तेजस्वी यादव को नेता चुना। कांग्रेस का प्रतिनिधित्व एमएलसी और राज्य इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष समीर कुमार सिंह तथा उनके दो विधायक कर रहे थे, जबकि अन्य चार विधायक दिल्ली में मौजूद थे।

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