Friday, March 27, 2026

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बिहार कैबिनेट में परिवारवाद का असर, 26 मंत्रियों में 10 हैं राजनीतिक वंशज

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी नई एनडीए सरकार में परिवारवाद का काफी प्रभाव दिख रहा है। मुख्यमंत्री के साथ शपथ लेने वाले 26 मंत्रियों में से 10 ऐसे हैं, जो किसी राजनीतिक परिवार से आते हैं। इनमें कुछ अपने पिता या पति की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, जबकि कई पहली बार मंत्री बने हैं।

परिवारवाद में शामिल नेता भाजपा, जदयू, हम और रालोमो से आते हैं। इनमें से विजय चौधरी, अशोक चौधरी, लेशी सिंह और नितिन नबीन जैसे नेताओं का राजनीतिक अनुभव भी है, क्योंकि ये कई बार मंत्री रह चुके हैं।

मुख्य परिवारवादी मंत्री और उनकी पृष्ठभूमि:

सम्राट चौधरी (जदयू, डिप्टी सीएम): राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी कांग्रेस, समता पार्टी और आरजेडी से कई बार विधायक रहे। सम्राट भी पहले राजद में मंत्री रह चुके हैं।

विजय कुमार चौधरी (जदयू): उनके पिता जगदीश प्रसाद चौधरी कांग्रेस नेता थे। विजय ने पिता के निधन के बाद कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत की और बाद में जदयू में शामिल हुए।

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अशोक चौधरी (जदयू): उनके पिता महावीर चौधरी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। अशोक ने भी कांग्रेस से शुरुआत की और बाद में जदयू में शामिल हुए। उनकी बेटी शांभवी लोजपा सांसद हैं।

संतोष कुमार सुमन (हम): केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के पुत्र। वर्तमान में हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।

दीपक प्रकाश (रालोमो): राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र। उनकी मां स्नेहलता भी विधायक हैं।

नितिन नबीन (भाजपा): उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा बिहार के वरिष्ठ भाजपा नेता रहे। पटना पश्चिम से सांसद रहे।

सुनील कुमार (जदयू): पूर्व आईपीएस अधिकारी, राजनीति में परिवारिक पृष्ठभूमि के साथ आए। उनके पिता चंद्रिका राम स्वतंत्रता सेनानी और मंत्री रह चुके हैं।

श्रेयसी सिंह (जदयू): निशानेबाज और राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता। उनके पिता दिग्विजय सिंह केंद्रीय मंत्री रह चुके थे।

रमा निषाद (भाजपा): उनके पति और ससुर भी पूर्व सांसद और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं।

लेशी सिंह (जदयू): पति बूटन सिंह के निधन के बाद राजनीति में प्रवेश किया।

इस कैबिनेट में परिवारवाद स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जहां कई नेता राजनीतिक विरासत के साथ अपने अनुभव का भी लाभ उठा रहे हैं।

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