न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- बरसाना में विश्व प्रसिद्ध लठामार होली बुधवार को रंगीली गली में खेली जाएगी। परंपरा के अनुसार नंदगांव के हुरियारे और बरसाना की हुरियारिनें आमने-सामने होंगी। लाठियों और ढाल के बीच होने वाला यह अनोखा उत्सव देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। भीड़ के चलते धर्मशालाएं, आश्रम और गेस्ट हाउस पूरी तरह भर चुके हैं।
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की नवमी को आयोजित होने वाले इस उत्सव में शाम करीब पांच बजे सोलह श्रृंगार कर हुरियारिनें लाठियां लेकर निकलेंगी। नंदगांव के हुरियारे ढाल के साथ पहुंचेंगे और रसिया गायन व नृत्य के बीच लठामार होली का रंग जमाएंगे। हंसी-ठिठोली के बीच लाठियों से प्रहार और ढाल से बचाव की परंपरा ब्रज की लोकसंस्कृति का अनूठा उदाहरण मानी जाती है।
इस आयोजन को देखने के लिए राजस्थान, दिल्ली, उत्तराखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से लोग पहुंचे हैं। कस्बे में भारी भीड़ के कारण कदम रखने तक की जगह नहीं बची है।
यातायात व्यवस्था चरमराई
लठामार होली से पहले यातायात दबाव बढ़ गया है। कोसीकलां में बाईपास पर अव्यवस्थित खड़े वाहनों और बदहाल बस स्टैंड के कारण जाम की स्थिति बनी हुई है। बाहर से आने वाले वाहनों की संख्या बढ़ने से हालात और बिगड़ गए हैं। स्थानीय लोगों ने अवैध पार्किंग हटाने और रोडवेज बसों का नियमित संचालन सुनिश्चित करने की मांग की है।
श्रद्धालुओं को गोवर्धन, नंदगांव और कोकिलावन शनिदेव धाम जाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वन-वे व्यवस्था लागू
जिला प्रशासन ने मंगलवार सुबह से बरसाना में प्रवेश के सभी मार्गों को वन-वे कर दिया है। श्रद्धालुओं को राधारानी मंदिर में एकल मार्ग से प्रवेश दिया जा रहा है और निकासी अलग रास्ते से कराई जा रही है।
रोडवेज बसों को कस्बे से करीब दो किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया, जिससे यात्रियों को तीन से चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। निजी वाहनों को भी निर्धारित पार्किंग स्थलों पर रोका गया है। पहाड़ी मार्ग से जयपुर मंदिर तक किसी भी वाहन को जाने की अनुमति नहीं दी गई है।
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कस्बे के कई प्रमुख मार्गों—पीली कोठी गेट, पुराने अड्डे वाला रास्ता, कटारा पार्क और बाजार क्षेत्र—में बैरिकेडिंग की गई है। इससे स्थानीय किसानों और निवासियों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
भारी भीड़ और अलर्ट को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रमुख चौराहों और मंदिर मार्गों पर अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है, ताकि उत्सव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
ब्रज की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक यह उत्सव हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। प्रशासन के लिए चुनौती है कि परंपरा, सुरक्षा और सुगम यातायात के बीच संतुलन बनाए रखा जाए।



