न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में एक बार फिर परंपरा टूटने का मामला सामने आया है। शरद पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर में दर्शन करीब 45 मिनट की देरी से शुरू हुए, जिससे हजारों श्रद्धालु शृंगार आरती के दर्शन से वंचित रह गए। सेवायतों ने इसकी जिम्मेदारी मंदिर की हाईपावर मैनेजमेंट कमेटी पर डालते हुए आरोप लगाया कि यह सब उनकी “हठधर्मिता” के कारण हुआ।
सेवायत गोस्वामी के अनुसार, 6 अक्टूबर को ठाकुर जी की शृंगार आरती के दौरान कमेटी द्वारा गर्भगृह के बाहर जगमोहन में सिंहासन लगाने के कारण, भक्तों को मंदिर में समय से दर्शन नहीं मिल सके। यह घटना 2023 में भी हुई थी, जिसकी जानकारी पहले भी कमेटी को दी जा चुकी थी, लेकिन सुधार नहीं हुआ।
यह भी पढ़े:- सीएम योगी का सफाईकर्मियों के लिए बड़ा ऐलान: खाते में आएंगे 16 से…
सेवायतों ने आरती के समय की पारंपरिक व्यवस्था भंग होने की बात कहते हुए विरोध जताया है। सोशल मीडिया पर सिंहासन के पास सेवायतों के आरती दर्शन करते हुए वीडियो भी वायरल हो रहा है।
भविष्य में लाइव दर्शन की तैयारी
मंदिर की हाईपावर कमेटी, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी है और जिसका नेतृत्व पूर्व न्यायाधीश कर रहे हैं, अब ठाकुर जी के दर्शन का लाइव प्रसारण शुरू करने जा रही है। इसके लिए चैनल्स और प्रसारण एजेंसियों से आवेदन मांगे गए हैं।
इसका उद्देश्य मंदिर में भीड़ कम करना और देश-विदेश में श्रद्धालुओं को घर बैठे दर्शन की सुविधा देना है।
सेवायत बनाम हाईपावर कमेटी: बढ़ता टकराव
बांके बिहारी मंदिर में लंबे समय से सेवायतों और कमेटी के बीच सामंजस्य की कमी देखी जा रही है। इसका असर श्रद्धालुओं को दर्शन में बाधा, परंपरा के उल्लंघन और भीड़ प्रबंधन की समस्याओं के रूप में बार-बार सामने आ रहा है।



