लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और महासचिव आजम खां 23 महीने बाद जेल से रिहा होने जा रहे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को क्वालिटी बार जमीन कब्जा मामले में भी उन्हें जमानत दे दी, जिससे अब उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। आजम के वकील मोहम्मद खालिद के अनुसार, सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी होते ही वे कुछ ही दिनों में सीतापुर जेल से बाहर आ जाएंगे।
राजनीतिक हलकों में आजम खां की वापसी को लेकर चर्चा तेज है। कुछ इसे सपा के लिए ताकत बढ़ाने वाला मान रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि इससे अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
आपको बतादें कि आजम खां यूपी के मुस्लिम समुदाय में प्रभावशाली नेता माने जाते हैं, खासकर रामपुर और आसपास के जिलों में। 2022 में जब वे पहली बार जेल से बाहर आए थे, तब अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से उनका स्वागत किया था। उस समय सपा को इसका राजनीतिक लाभ भी मिला था।
हालांकि, इस बार स्थिति थोड़ी अलग है। रामपुर लोकसभा सीट से सपा ने मोहिबुल्लाह नकवी को उम्मीदवार बनाया, जो आजम के आलोचक माने जाते हैं। इस फैसले को आजम के खिलाफ सपा के रुख के तौर पर देखा गया था। आजम ने जेल से ही एक पत्र लिखकर INDIA गठबंधन पर मुस्लिम नेतृत्व खत्म करने का आरोप भी लगाया था।
आजम खां, उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम को अक्टूबर 2023 में सात साल की सजा सुनाई गई थी। पत्नी और बेटे को पहले ही जमानत मिल चुकी थी, लेकिन आजम अन्य मामलों के चलते अब तक जेल में थे। अब हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद उनकी रिहाई करीब है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आजम की वापसी से सपा को मुस्लिम-यादव समीकरण फिर से मजबूत करने का मौका मिल सकता है। लेकिन अगर आजम खां ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ कोई बयानबाज़ी की, तो सपा का वोटबैंक विभाजित हो सकता है।
फिलहाल अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से आजम खां की रिहाई को लेकर कोई बयान नहीं आया है। लेकिन सोशल मीडिया पर समर्थकों ने उनके स्वागत की तैयारियां शुरू कर दी हैं।



