नई दिल्ली/सर्वोदय:- क्या आपकी नवजात बेटी को शुरुआती बीमारियों में बार-बार एंटीबायोटिक दी गई है? तो सावधान हो जाइए। एक हालिया अध्ययन ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है कि नवजात कन्याओं को जीवन के पहले साल में दी गई एंटीबायोटिक दवाएं, उनके समय से पहले यौवन (Early Puberty) लाने का कारण बन सकती हैं। यह शोध यूरोपियन सोसाइटी की पहली संयुक्त कांग्रेस में प्रस्तुत किया गया।
क्या कहती है नई रिसर्च?
इस अध्ययन में दक्षिण कोरिया के हानयांग यूनिवर्सिटी गुरी अस्पताल और हानयांग यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने 0 से 12 महीने की उम्र के 3,22,731 बच्चों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। निष्कर्षों के मुताबिक: जिन लड़कियों को 3 महीने की उम्र से पहले एंटीबायोटिक दी गई, उनमें 33% अधिक संभावना समय से पहले यौवन शुरू होने की पाई गई। जिन कन्याओं को 14 दिन के भीतर एंटीबायोटिक दी गई, उनमें यह जोखिम 40% तक बढ़ गया। जबकि लड़कों में ऐसा कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया।
क्या होता है समय से पहले यौवन (Central Precocious Puberty – CPP)?
CPP एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चों में यौन विकास सामान्य उम्र से पहले शुरू हो जाता है।
लड़कियों में: 8 वर्ष से पहले पीरियड्स या स्तनों का विकास
लड़कों में: 9 वर्ष से पहले यौन लक्षणों का प्रकट होना
यह स्थिति अधिकतर लड़कियों में पाई जाती है और इसके पीछे कोई स्पष्ट जैविक कारण अक्सर नहीं होता।
क्यों है यह चिंताजनक?
आजकल कई परिवारों में देखने को मिल रहा है कि 9 साल की बच्चियां भी पीरियड्स का अनुभव करने लगी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बहुत कम उम्र में यौवन आने से न केवल मानसिक और शारीरिक विकास प्रभावित होता है, बल्कि आगे चलकर हॉर्मोनल असंतुलन, डायबिटीज, मोटापा और अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
क्या करें माता–पिता?
डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को एंटीबायोटिक न दें
हल्की बीमारियों में घरेलू या प्राकृतिक उपचार अपनाएं
बच्चों की दवाओं का इतिहास रखें
बच्चों के शारीरिक बदलावों पर सतर्क निगरानी रखें
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