न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- लोकसभा में अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकसभा स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव लाना संसदीय परंपराओं के लिए अफसोसनाक घटना है।
शाह ने कहा कि विपक्ष ने स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाया है, जबकि वह पूरे सदन के अभिभावक और सभी सदस्यों के हितों के संरक्षक होते हैं।
ओम बिरला की तारीफ भी की
अपने भाषण में अमित शाह ने Om Birla की प्रशंसा करते हुए कहा कि विपक्ष को उन्हें मर्यादा सिखाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा,“ओम बिरला ऐसे स्पीकर हैं, जो पहले दिन से ही आसन छोड़कर सदन में बैठते हैं। उनकी प्रशंसा की जानी चाहिए।”
शाह ने यह भी कहा कि स्पीकर को संविधान में विशेष संरक्षण इसलिए दिया गया है क्योंकि वह पक्ष और विपक्ष दोनों के स्पीकर होते हैं।
नियमों के खिलाफ बोलने का अधिकार नहीं
गृह मंत्री ने कहा कि किसी भी सदस्य को सदन में नियमों के खिलाफ बोलने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि स्पीकर के फैसले से असहमति हो सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय स्पीकर का ही होता है।
अगर सदन के नियमों का उल्लंघन होता है तो स्पीकर के पास सदस्य को रोकने या बाहर करने का अधिकार भी है।
स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाना गलत
अमित शाह ने कहा कि जब सदन के मुखिया की निष्ठा पर सवाल उठाए जाते हैं तो इससे दुनिया में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की साख प्रभावित होती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बजट सत्र के पिछले चरण में स्पीकर के चैंबर में ऐसा माहौल बना दिया गया था जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो गई थी।
अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष ने जिस अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया, उसमें भी कई खामियां थीं। उन्होंने बताया कि प्रस्ताव पर वर्ष 2026 की जगह 2025 लिखा हुआ था और संकल्प भी सही तरह से संलग्न नहीं किया गया था।
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शाह ने कहा कि बाद में विपक्ष को इसे वापस लेकर दूसरा नोटिस देना पड़ा, लेकिन उसमें भी नियमों का ठीक से पालन नहीं किया गया।
नियमों से चलेगा सदन
अमित शाह ने तंज कसते हुए कहा कि संसद किसी पार्टी के नियमों से नहीं बल्कि संसदीय नियमों से चलेगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष नियमों का पालन नहीं करता और बाद में आरोप लगाता है कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता।



