लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी की एक बैठक में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब एटा और कासगंज से जुड़े दो नेताओं के बीच तीखी बहस हो गई। यह विवाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, बात इतनी बढ़ गई कि दोनों नेताओं के बीच गाली-गलौज तक की स्थिति बन गई। इसके बाद पार्टी ने एटा और कासगंज की जिला इकाइयों पर बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया।
चुनावी रणनीति पर हो रही थी बैठक
लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में एटा और कासगंज के नेताओं व पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी। बैठक का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन की स्थिति, पिछले चुनावों के प्रदर्शन और आगे की रणनीति पर चर्चा करना था।
इसी दौरान एटा जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव और सपा नेता मंजीत यादव के बीच किसी मुद्दे को लेकर मतभेद हो गया। चर्चा के दौरान दोनों के बीच बहस तेज हो गई और मामला व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया।
अखिलेश यादव के सामने बढ़ा विवाद
रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच विवाद अखिलेश यादव की मौजूदगी में ही हुआ। बैठक में मौजूद अन्य नेताओं ने स्थिति को शांत कराने की कोशिश की। कुछ रिपोर्टों में दोनों के बीच गाली-गलौज होने का भी दावा किया गया है।
अखिलेश यादव ने नेताओं को पार्टी अनुशासन का पालन करने की नसीहत दी। विवाद से नाराज होकर उनके बैठक से चले जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है।
करीब एक घंटे बाद आया बड़ा फैसला
बैठक में हुए विवाद के बाद समाजवादी पार्टी ने एटा और कासगंज के संगठन को लेकर बड़ा फैसला लिया। दोनों जिलों की जिला कार्यकारिणियां भंग कर दी गईं और जिलाध्यक्षों को भी हटा दिया गया। इसके अलावा दोनों जिलों के फ्रंटल संगठनों की इकाइयों को भी भंग करने की जानकारी सामने आई है।
पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल एटा और कासगंज के पदाधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है। अब दोनों जिलों में नए संगठन के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
विवाद के बाद दोनों नेताओं ने मांगी माफी
मामले के बाद दोनों नेताओं की ओर से माफी मांगने की बात भी सामने आई है। उन्होंने खुद को पार्टी का अनुशासित कार्यकर्ता बताते हुए संगठन के फैसले को स्वीकार करने की बात कही है।
चुनाव से पहले संगठन पर फोकस
समाजवादी पार्टी इस समय 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। ऐसे समय में दो जिलों की संगठनात्मक इकाइयों को भंग किए जाने से पार्टी के स्थानीय संगठन में बदलाव की प्रक्रिया शुरू होगी। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन और संगठन की स्थिति को लेकर भी बैठक में चर्चा की गई थी।
इस घटनाक्रम के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि एटा और कासगंज में सपा नए संगठन का गठन किस तरह करती है और आने वाले चुनाव के लिए स्थानीय स्तर पर किस तरह की जिम्मेदारियां तय की जाती हैं।


