न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- महिला आरक्षण को लेकर सियासी घमासान के बीच Akhilesh Yadav ने बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। उन्होंने Seema Rajbhar को समाजवादी महिला सभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर एक साथ कई संदेश देने की कोशिश की है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब भाजपा लगातार सपा को महिला विरोधी बताने में जुटी है। ऐसे में इस नियुक्ति के जरिए सपा ने खुद को महिला हितैषी और पिछड़े वर्गों का समर्थक दिखाने की रणनीति अपनाई है।
एक तीर से दो निशाने
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस कदम के जरिए Akhilesh Yadav ने दो बड़े लक्ष्य साधने की कोशिश की है।
पहला—पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को मजबूत करना।
दूसरा—भाजपा के सहयोगी Om Prakash Rajbhar पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाना।
राजभर समाज की राजनीति में Om Prakash Rajbhar का प्रभाव माना जाता है, ऐसे में सीमा राजभर को आगे लाकर सपा ने उसी वोट बैंक में सेंध लगाने का संकेत दिया है।
पूर्वांचल और सीमावर्ती इलाकों पर फोकस
राजभर समाज का असर पूर्वांचल से लेकर बिहार सीमा तक कई सीटों पर है। माना जाता है कि उत्तर प्रदेश की करीब 10 लोकसभा और 30 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर यह समुदाय निर्णायक भूमिका निभाता है।
2022 के विधानसभा चुनाव में Om Prakash Rajbhar ने भाजपा के खिलाफ सपा के साथ गठबंधन किया था, जिससे कई क्षेत्रों में भाजपा को नुकसान उठाना पड़ा था।
निषाद समीकरण भी साधने की कोशिश
इससे पहले Akhilesh Yadav ने Rukmani Nishad को यूपी महिला सभा की कमान सौंपी थी। वह Phoolan Devi की बहन हैं और निषाद समाज में उनकी पकड़ मानी जाती है।
निषाद समाज की राजनीति में Sanjay Nishad का दबदबा है, जो वर्तमान में भाजपा के सहयोगी हैं। ऐसे में रुकमणी निषाद को आगे लाना भी सपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
पीडीए फार्मूले को धार
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान सपा ने पीडीए का नारा दिया था, जिसके तहत पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट करने की कोशिश की गई। अब महिला नेतृत्व में बदलाव कर उसी रणनीति को और मजबूत करने का प्रयास दिख रहा है।
पहले महिला सभा के शीर्ष पदों पर अगड़ी जातियों का दबदबा रहा, लेकिन अब Seema Rajbhar और Rukmani Nishad जैसी पिछड़े वर्ग की नेताओं को जिम्मेदारी देकर सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है।