यूपी पंचायत चुनाव: वोटर लिस्ट से हट सकते हैं 1.25 करोड़ नाम! EC को अखिलेश यादव ने बताया ‘जुगाड़ आयोग’

लखनऊ /सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में बड़े बदलाव की खबरें सामने आ रही हैं। एक समाचार चैनल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से 1.25 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। इस रिपोर्ट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

अखिलेश का EC पर हमला: “अब यह जुगाड़ आयोग बन गया है”

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:”चुनाव आयोग अब ‘जुगाड़ आयोग’ बन चुका है। अगर AI से 1.25 करोड़ वोटर पहचान लिए गए हैं, तो फिर हमारे द्वारा दिए गए 18,000 हलफनामों का जवाब क्यों नहीं दिया गया?”

उन्होंने चैनल की उस रिपोर्ट को भी साझा किया जिसमें दावा किया गया है कि अलग-अलग गांवों में डुप्लीकेट वोटरों की पहचान कर उनके नाम हटाए जा रहे हैं।

“18 हजार हलफनामों में से सिर्फ 14 का जवाब”

अखिलेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग, भाजपा और जिला प्रशासन की तिकड़ी ने सपा द्वारा सौंपे गए 18,000 शपथ पत्रों में से सिर्फ 14 का ही जवाब दिया है।”हमने जो सबूत दिए हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है।”

उन्होंने यह भी कहा कि ‘वोट डकैती’ देश के लोकतंत्र पर हमला है और आयोग इसमें मूक दर्शक बना हुआ है।

विश्वविद्यालयों पर भी साधा निशाना

इसी बीच, अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर विश्वविद्यालयों को “संगी-साथीकरण” (राजनीतिकरण) का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा:”भाजपा ने विश्वविद्यालयों को अपने एजेंडे का केंद्र बना दिया है। इससे पढ़ाई, छात्रों का भविष्य और शिक्षण प्रणाली सब प्रभावित हो रहे हैं। भाजपा जाए तो शिक्षा आए।”

AI से हटेंगे वोटर?

समाचार चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, पंचायत चुनाव की तैयारी के तहत AI तकनीक से डुप्लीकेट और फर्जी मतदाताओं की पहचान की जा रही है। इस प्रक्रिया के तहत 1.25 करोड़ नामों को सूची से हटाया जा सकता है। हालांकि, चुनाव आयोग की तरफ से इस पर आधिकारिक बयान अभी नहीं आया है।

राजनीतिक माहौल गरमाया

कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले ही ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर हमलावर हैं और ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के तहत पूरे देश में अभियान चला रहे हैं। अब अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर यह हमला इस बात का संकेत है कि विपक्ष ने चुनावी पारदर्शिता को बड़ा मुद्दा बनाने का फैसला कर लिया है।

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