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योगी ने बदल दी राजनीति की परिभाषा

सर्वोदय (लखनऊ):- दायित्व के अनुसार अस्थायी रूप से किसी व्यक्ति का स्थान बदल सकता है। पर, उसकी परंपरा और संस्कार नहीं बदलते। बल्कि उसके पद और दायित्व के अनुसार इनका और विस्तार ही होता है। उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके आठ साल का सफल कार्यकाल इसका प्रमाण है।

उल्लेखनीय है कि योगी जी का गृह जनपद गोरखपुर है। यहीं उत्तर भारत की प्रमुख धार्मिक पीठों में शुमार गोरक्षपीठ है। इस पीठ को देश-दुनिया में फैले नाथपंथ का मुख्यालय माना जाता है। योगी जी मुख्यमंत्री होने के साथ इसी पीठ के पीठाधीश्वर भी हैं। इस रूप में दीक्षित योगी (संन्यासी) भी है। खुद के योगी होने पर उनको गर्व भी है। समय-समय पर सदन से लेकर सार्वजनिक सभाओं में वह इस बात को कहते भी हैं।

आठ साल पहले जब एक लंबे अंतराल के बाद उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भाजपा को बहुमत मिला तो 19 मार्च 2017 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर, आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े और राजनीति के लिहाज से सर्वाधिक संवेदनशील सूबे के मुखिया का दायित्व संभाला। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने पीठ की लोककल्याण की परंपरा और संस्कार के फलक को अपने पद के अनुसार लगातार विस्तार दिया। उन्होंने साबित किया कि जनकेंद्रित राजनीति के केंद्र में भी धर्म हो सकता है। उनके दादा गुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के समय में जिस ‘हिंदू और हिंदुत्व’ को प्रतिगामी माना जाता था उसे योगी ने बहस के केंद्र में ला दिया। जो पहले भगवान श्रीराम की आलोचना करते थे, उनको काल्पनिक बताते थे ऐसे लोग भी खुद को हिंदू कहलाकर गौरवान्वित महसूस करते हैं। इस तरह उन्होंने धर्म और राजनीति को लोक कल्याण का जरिया बनाकर साबित किया कि संत, समाज का वैचारिक मार्गदर्शन करने के साथ सत्ता का कुशलता से नेतृत्व भी कर सकता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ के खाते में ढेर सारी उपलब्धियां दर्ज हैं। 2019 में एक प्रतिष्ठित पत्रिका के सर्वे में उनको देश का सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री माना गया।

सच साबित हुई ‘मैं कभी हारा नहीं’ का बयान
एक इंटरव्यू में कभी योगी जी कहा था कि वह कभी हारे नहीं हैं। गोरखपुर से संसदीय चुनावों में वह अजेय रहे हैं तो पहली बार 2022 में विधानसभा चुनाव लड़कर उन्होंने अपनी अपराजेय लोकप्रियता को पुनः प्रमाणित किया।

मंदिर आंदोलन के दौरान आए महंत अवेद्यनाथ के संपर्क में
जन, जल, जंगल और जमीन से प्यार करने वाले योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को पौढ़ी गढ़वाल (उत्तराखंड) के पंचुर गांव में एक सामान्य परिवार में हुआ था। संयोग से उसी दिन विश्व पर्यावरण दिवस भी पड़ता है। उनके पिता स्वर्गीय आनंद सिंह विष्ट वन विभाग में रेंजर थे। बाल्यकाल से राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रेरित योगी का जुड़ाव नब्बे के दशक में राम मंदिर आंदोलन से हो गया। राम मंदिर आंदोलन के दौरान ही वह इस आंदोलन के नायक गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ के संपर्क में आए। महंत जी के सानिध्य और उनसे प्राप्त नाथपंथ के बारे में मिले ज्ञान ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि गढ़वाल विश्वविद्यालय से स्नातक विज्ञान तक शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने सन्यास लेने का निर्णय कर लिया। इसी क्रम में वह 1993 में गोरखनाथ मंदिर आ गए और नाथ पंथ की परंपरा के अनुरूप धर्म, अध्यात्म की तात्विक विवेचना और योग साधना में रम गए। उनकी साधना और अंतर्निहित प्रतिभा को देख महंत अवेद्यनाथ ने उन्हें 15 फरवरी 1994 को गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी के रूप में दीक्षा प्रदान किया। गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी के रूप में उन्होंने पीठ की लोक कल्याण और सामाजिक समरसता के ध्येय को सदैव विस्तारित किया।

22 साल की उम्र में ली नाथपंथ की दीक्षा
महज 22 साल की उम्र में योगी जी नाथपंथ में दीक्षित होकर वह सन्यासी (योगी) बने। इस रूप में वह गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के उत्तराधिकारी बने। अवेद्यनाथ संत समाज एवं समाज में एक सर्व स्वीकार्य नाम था। इसलिए उनको राष्ट्र संत भी कहा जाता है। एक योग्य गुरु को एक योग्य शिष्य से अधिक क्या चाहिए। अपने गुरु के ब्रह्मलीन होने के बाद अपने पहले साक्षात्कार में योगी ने कहा भी था, ‘गुरुदेव के सम्मोहन ने सन्यासी बना दिया।’ दोनों का एक दूसरे पर अटूट भरोसा था। यही वजह रही कि पीठ के उत्तराधिकारी के रूप में धार्मिक विरासत सौंपने के कुछ साल बाद ही ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ ने अपने प्रिय शिष्य (योगी) को अपनी राजनीतिक विरासत भी सौंप दी।

14 सितंबर 2014 में बने गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर

महंत अवेद्यनाथ के ब्रह्मलीन होने के उपरांत वह14 सितंबर 2014 को गोरक्षपीठाधीश्वर (महंत) के रूप मे पदासीन हुए। इसी भूमिका के तदंतर वह इसी तिथि से अखिल भारतीय बारह भेष पंथ योगी सभा के अध्यक्ष भी हैं।

बेदाग रहा राजनीतिक सफर
योगी आदित्यनाथ को राजनीतिक दायित्व भी गोरक्षपीठ से विरासत में मिला है। उनके दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ गोरखपुर संसदीय क्षेत्र का एक बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनके गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ गोरखपुर संसदीय क्षेत्र से चार बार सांसद और मानीराम विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे हैं। 1996 में गोरखपुर लोकसभा से चुनाव जीतने के बाद ही महंत अवेद्यनाथ ने घोषणा कर दी थी कि उनकी राजनीति का उत्तराधिकार भी योगी ही संभालेंगे। इसके बाद योगी 1998 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर से चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल कर बारहवीं लोकसभा में उस वक्त सबसे कम उम्र (26 वर्ष) के सांसद बने। तब से 2014 तक लगातार पांच बार संसदीय चुनाव में जीत हासिल करने वाले वह विरले सांसदों में रहे।

मठ छूटा संस्कार वही
2017 में उत्तर प्रदेश में जब भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला तो पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया। 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की शपथ लेने वाले योगी ने तमाम उपलब्धियों के बीच न केवल शानदार कार्यकाल पूरा किया बल्कि सार्वजनिक जीवन में बेदाग छवि को भी बरकरार रखा है। इन आठ वर्षों के दौरान उनकी खुद की जीवनचर्या सन्यासी की ही भांति रही। सादगीपूर्ण व अनुशासित जीवनशैली में तनिक भी परिवर्तन नहीं आया है। सम्भवतः वह प्रदेश के अबतक के इकलौते मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने प्रदेश के हर जिले का कई बार दौरा करने के साथ नोएडा जाने के मिथक को भी तोड़ा है। पहले मुख्यमंत्री इस मिथक के भय से नोएडा नहीं जाते थे कि वहां जाने से सीएम की कुर्सी चली जाती है। योगी ने आधा दर्जन से अधिक बार नोएडा की यात्रा कर यह साबित किया है कि एक संत का ध्येय सिर्फ सत्ता बचाए रखना नहीं बल्कि लोक कल्याण होता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य बने और 2022 के विधानसभा चुनाव में एक लाख से अधिक वोटों से जीतकर और अपनी पार्टी बीजेपी को सूबे में प्रचंड बहुमत दिलाकर दोबारा मुख्यमंत्री बने।

योगी के नेतृत्व में बदल गया परसेप्शन, मजबूत हुई यूपी की पहचान
पहले कार्यकाल में योगी का फोकस प्रदेश के बाबत देश-दुनिया में जो खराब परसेप्शन था, उसको बदलने का था। इसमें कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस जैसी नीतियां कारगर रहीं। दूसरे कार्यकाल में फोकस प्रदेश की पहचान बदलने पर रहा। अब जब उनके दूसरे कार्यकाल का तीसरा साल पूरा होने जा रहा है, यूपी नए भारत का नया उत्तर प्रदेश के रूप में सबके सामने है। आज उत्तर प्रदेश की पहचान एक अपराधग्रस्त या दंगाग्रस्त प्रदेश के रूप में नहीं है। आज देश के अंदर उत्तर प्रदेश बेहतर कानून व्यवस्था के रूप में जाना जाता है और अलग-अलग राज्यों में उत्तर प्रदेश के मॉडल को उतारने और उसको जानने की उत्सुकता भी रहती है। बीते 8 वर्षों में उत्तर प्रदेश को देश की सातवें से दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के बाद अब लक्ष्य विकास के हर मानक पर नम्बर एक होने की है। नोएडा में फिल्म सिटी, डेटा पार्क, अयोध्या और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हेल्थपार्क, लेदर पार्क, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, मेट्रो रेल का विस्तार, रैपिड रेल विस्तार, ओडीओपी और एमएसएमई के जरिये निर्यात को दोगुना करने, ब्रांड उप्र को देश और दुनिया में स्थापित करने जैसे बहुआयामी कार्यक्रमों से उत्तर प्रदेश के विकास को और रफ्तार देने की तैयारी है। विकास के यह नए मानक प्रदेश को नई पहचान दिलाने वाले होंगे। प्रयागराज के महाकुंभ के रूप में दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागम के सफल आयोजन ने उनकी लोकप्रियता में एक और चार चांद लगा दिया।

संत के रूप में योगी की उपलब्धियां
वर्ष 1997, 2003, 2006 में गोरखपुर में और 2008 में तुलसीपुर (बलरामपुर) में विश्व हिन्दू महासंघ के अन्तर्राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन।
सहभोज के माध्यम से छुआछूत और अस्पृश्यता की भेदभावकारी रूढ़ियों पर प्रहार। सीएम योगी ‘यौगिक षटकर्म, ‘हठयोग: स्वरूप एवं साधना, ‘राजयोग: स्वरूप एवं साधना’ तथा ‘हिन्दू राष्ट्र नेपाल’ नामक पुस्तकों का लेखन करने वाले योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मन्दिर से प्रकाशित मासिक योग पत्रिका ‘योगवाणी’ के प्रधान सम्पादक भी हैं।

सीएम योगी ने रामलला के श्रीचरणों में झुकाया शीश, हनुमानगढ़ी में भी लगाई हाजिरी

सर्वोदय (अयोध्या):- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को रामनगरी पहुंचे। उन्होंने अपने दौरे का आगाज हनुमानगढ़ी में संकट मोचन के चरणों में हाजिरी लगाकर किया। यहां उन्होंने संतों से भी मुलाकात की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने श्रीरामलला के चरणों में भी प्रणाम निवेदित किया।

सीएम ने की प्रदेश के कल्याण की कामना
शुक्रवार सुबह तुलसीपुर में मां पाटेश्वरी के दर्शन-पूजन व स्थानीय लोगों से मिलने के उपरांत मुख्यमंत्री रामनगरी पहुंचे, जहां रामकथा पार्क स्थित हैलीपेड पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों व भाजपा नेताओं ने उनका स्वागत किया। रामकथा पार्क से सीएम योगी सीधे हनुमानगढ़ी पहुंचे, जहां रामभक्त संकटमोचन हनुमान के दरबार में हाजिरी लगाई और प्रदेश के कल्याण की कामना की। सीएम ने दर्शन-पूजन के उपरांत निकलते समय आमजन का अभिवादन भी स्वीकार किया।

मुख्यमंत्री ने संतों से भी की मुलाकात, पूछा कुशलक्षेम
मुख्यमंत्री ने हनुमानगढ़ी में संतों से भी मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जाना। यहां मुख्यमंत्री सबसे पहले गद्दीनशीन महंत प्रेमदास महाराज जी महाराज से मिले। इसके बाद मुख्यमंत्री यहां अन्य संतों से भी मिले और उनका हालचाल जाना।

निर्माण कार्यों की प्रगति के बारे में ली जानकारी
इसके बाद मुख्यमंत्री श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचे और श्रीरामलला के चरणों में शीश झुकाया। मुख्यमंत्री ने यहां विधिवत दर्शन-पूजन भी किया। इसके बाद उन्होंने राम मंदिर निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया, यहां चल रहे निर्माण कार्य की प्रगति के बारे में भी जानकारी ली। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्र ने मुख्यमंत्री को यहां चल रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने इस दौरान आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।इस दौरान योगी सरकार के मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राकेश सचान, महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, रामचंद्र यादव, अभय सिंह, चंद्रभानु पासवान आदि मौजूद रहे।

जीवों का अंतिम और सच्चा सहारा केवल परमेश्वर : आचार्य ज्ञान प्रकाश

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सर्वोदय (अयोध्या):-  अयोध्या जनपद के तारून ब्लॉक स्थित गंगातारा गांव में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन बड़े श्रद्धा भाव से किया गया। कथा वाचक आचार्य ज्ञान प्रकाश शास्त्री जी ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण की दिव्य लीला का भावविभोर कर देने वाला वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब संपूर्ण संसार पीड़ा और अन्याय के अंधकार में डूबा हुआ था, चारों ओर अधर्म का बोलबाला था और संत, पृथ्वी, गौ माता व ब्रह्मांड अपने-अपने धर्म का पालन करने में असमर्थ हो चुके थे, तब प्रभु ने इस धरती पर अवतरण का संकल्प लिया। रात्रि की उस घड़ी में जब तीन ही प्राणी जाग रहे थे – देवकी, वासुदेव और चंद्रमा – तभी भगवान श्रीकृष्ण ने अपने अद्भुत रूप में जन्म लिया। आचार्य जी ने बताया कि ईश्वर का साक्षात्कार वही कर सकता है जो कर्म और वासना से ऊपर उठ चुका हो।

उन्होंने श्रीमद्भागवत को समस्त ग्रंथों का सार बताया, जो न केवल मनुष्यों को, बल्कि प्रेत योनि में पड़ी आत्माओं को भी मुक्ति प्रदान करती है। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि भगवान ही जीवों के सच्चे और एकमात्र कल्याणकर्ता हैं।भागवत भक्ति प्रधान ग्रंथ है, जिसमें जाति, पंथ, देश और काल का कोई बंधन नहीं है – यहाँ केवल भाव और कर्म ही मुख्य हैं। कथा में अजामिल, गजेंद्र और गिद्ध जैसे पात्रों के प्रसंगों से यह शिक्षा मिलती है कि श्रद्धा और सच्चे भाव से ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में महिलाओं ने मंगल गीतों की गूंज से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।इस शुभ अवसर पर राजेश दुबे, सुनील दुबे, संदीप यादव, सुशील सिंह, प्रवीण सिंह और शशिकांत पांडेय जैसे गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

‘छावा’ कमाएगी 600 करोड़, सामने आया मेकर्स का तगड़ा गेम प्लान

सर्वोदय(लखनऊ):-  विक्की कौशल स्टारर फिल्म ‘छावा’ की सफलता की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। पांच हफ्तों के लंबे सफर के बाद भी फिल्म का कलेक्शन लगातार बढ़ रहा है। अब जब फिल्म अपने छठे वीकेंड में कदम रखने जा रही है, तो माना जा रहा है कि यह फिल्म एक और नया रिकॉर्ड अपने नाम कर सकती है।साल की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक बनी ‘छावा’ की कमाई की चाल देखकर लग रहा है कि सलमान खान की ‘सिकंदर’ के रिलीज होने से पहले ही ये फिल्म 600 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर सकती है।

अब तक का कलेक्शन – हफ्तावार आंकड़े:

  • पहला हफ्ता – ₹225.28 करोड़
  • दूसरा हफ्ता – ₹186.18 करोड़
  • तीसरा हफ्ता – ₹84.94 करोड़
  • चौथा हफ्ता – ₹43.98 करोड़

वही इसके बाद फिल्म ने: 29वें दिन – ₹7.25 करोड़,30वें दिन – ₹7.9 करोड़, 31वें दिन – ₹8 करोड़,32वें से 34वें दिन – हर दिन लगभग  ₹6.5 करोड़ | इस तरह 34 दिनों में कुल कमाई ₹583.03 करोड़ हो चुकी है।

‘छावा’ की कहानी और कलाकार

फिल्म का निर्देशन लक्ष्मण उतेकर ने किया है और इसकी कहानी छत्रपति शिवाजी महाराज के वीर पुत्र संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित है।इसमें विक्की कौशल ने संभाजी का दमदार किरदार निभाया है। रश्मिका मंदाना, विनीत कुमार सिंह और अक्षय खन्ना भी अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं।

 

डायबिटिक और ओवरवेट मरीजों के लिए भारत में लॉन्च हुआ आधुनिक ट्रीटमेंट ऑप्शन ‘माउंजारो’

सर्वोदय(नई दिल्ली):- आपके द्वारा साझा की गई जानकारी भारत में डायबिटीज और मोटापे से जूझ रहे करोड़ों लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण और संभावनाओं से भरी चिकित्सा उपलब्धि को दर्शाती है। आइए इसे संक्षेप और सरल भाषा में समझते हैं: भारत में मोटापा और डायबिटीज की डबल मार

  • भारत में करोड़ों लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जिनमें से आधे से ज्यादा एडल्ट्स का ग्लाइसेमिक कंट्रोल पर्याप्त नहीं है।
  • मोटापा, डायबिटीज के खतरे को और भी बढ़ा देता है। यह अकेले करीब 200 से ज्यादा हेल्थ प्रॉब्लम्स से जुड़ा है, जैसे:
    • हार्ट डिजीज
    • हाई ब्लड प्रेशर
    • स्लीप एपनिया

माउंजारो (Mounjaro): नई उम्मीद की दवा

  • एली लिली एंड कंपनी ने मशहूर वेट लॉस इंजेक्शन माउंजारो को भारत में लॉन्च किया है।
  • यह दवा टाइप 2 डायबिटीज, मोटापा, और ओवरवेट मरीजों के लिए खास है।
  • माउंजारो का केमिकल नाम: TIRZEPATIDE है।

क्लीनिकल ट्रायल से जुड़े अहम आंकड़े:

  • 21.8 किलो तक वजन घटा हाई डोज पर (72 सप्ताह में)
  • 15.4 किलो वजन घटा लो डोज पर
  • हर 3 में से 1 मरीज ने 25% तक बॉडी वेट घटाया (SURMOUNT-1 ट्रायल)
  • A1C लेवल में 2.4% तक की गिरावट दर्ज की गई (SURPASS ट्रायल)
  • ट्रायल में मरीजों को मेटफॉर्मिन, SGLT2 इनहिबिटर, इंसुलिन ग्लार्गिन जैसी आम डायबिटीज दवाओं के साथ माउंजारो दिया गया।

कैसे काम करती है माउंजारो?

  • ये दवा GIP और GLP-1 रिसेप्टर्स को टारगेट करती है।
  • ये दोनों रिसेप्टर्स भूख को कंट्रोल करते हैं और:
    • भूख कम करते हैं
    • फैट मास और बॉडी वेट घटाते हैं
    • लिपिड मेटाबोलिज्म को रेगुलेट करते हैं

माउंजारो की खास बातें:

  • सिंगल डोज इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध
  • भारत में CDSCO (ड्रग रेगुलेटर) से मंजूरी प्राप्त
  • पहले से ही US, UK और यूरोप में पॉपुलर

भारत में तेजी से बढ़ते डायबिटीज और मोटापे के मामलों को देखते हुए माउंजारो एक गेम चेंजर साबित हो सकती है। हालांकि, इसे सिर्फ डॉक्टर की सलाह और देखरेख में ही लिया जाना चाहिए।

न्यूजीलैंड के PM ने दिल्ली में कपिल देव के साथ खेला गली क्रिकेट

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सर्वोदय (नई दिल्ली):-  न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कपिल देव के साथ दिल्ली की सड़कों पर गली क्रिकेट खेलकर एक अद्भुत पल साझा किया। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन और पूर्व क्रिकेटर रॉस टेलर ने नई दिल्ली में गली क्रिकेट खेला। उनके साथ भारत के पूर्व कप्तान कपिल देव भी मौजूद रहे, जो कि अंपायरिंग करते नजर आए। यह ना केवल खेल के प्रति प्रेम को दिखाता है, बल्कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच सहयोग और मित्रता को भी बढ़ावा देता है। इस खेल में व्यापार और रिश्तों के अलावा, एक सहज और मस्ती भरी भावना भी थी, जो दोनों देशों के बीच अच्छे संबंधों को और मजबूत करती है।दिल्ली में गली क्रिकेट खेलते हुए कपिल देव और न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने खूब लाइमलाइट लूटी। वहीं न्यूजीलैंड के स्पिनर एजाज पटेल भी इसमें शामिल हुए।

दरअसल, न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने कपिल देव के साथ मिलकर दिल्ली में गली क्रिकेट खेला। इस मैच के लिए दो टीमें बनीं। एक टीम में खुद लक्सन और कपिल देव शामिल रहे, जबकि दूसरी टीम में न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर रॉस टेलर और एजाज पटेल शामिल रहे। मैच में क्रिस्टोफर लक्सन की फील्डिंग देख कपिल देव भी हैरान रह गए। उन्होंने एजाज पटेल का कैच लपका। उनके कैच की तारीफ एजाज और रॉस टेलर ने भी लक्सन के कैच की तारीफ की।

इसके बाद पीएम लक्सन ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा, “यह अविश्वसनीय है। मैं नई दिल्ली की सड़कों पर कुछ अद्भुत बच्चों के साथ कपिल देव के साथ क्रिकेट खेल रहा हूं। मैंने कपिल देव के साथ मिलकर रॉस टेलर और अजाज पटेल के खिलाफ खेला है।”वहीं, एजाज ने पीएम लक्सन की फील्डिंग को देखकर कहा कि मैंने सोचा कि मैं इसे लेग साइड से देखूंगा, और मैं भूल गया कि पीएम वहां खड़े थे। यह अविश्वसनीय था। यह एक अच्छा कैच था।पीएम लक्सन ने गली में विकेटों के बीच कड़ी दौड़ लगाते हुए कपिल देव के साथ अपनी साझेदारी का आनंद लिया।

बता दें कि न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर भारत के साथ व्यापार समझौते के लिए आए हैं और भारत के साथ फ्री ट्रेड व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर को लेकर उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। इस समझौते से दोनों देशों के बीच अगले 10 सालों के व्यापार में 10 गुणा बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है।दोनों देशों ने 16 मार्च को आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लिए बातचीत फिर से शुरू करने की घोषणा की है। वहीं, ये भी तभी तय हुआ था कि बच्चों के साथ क्रिकेट खेलने का यह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

युवक ने खुद ही कर ल‍िया अपना ऑपरेशन, YouTube देख लगाए 11 टांके

सर्वोदय (मथुरा):-  मथुरा के वृंदावन से एक हैरान करने वाला मामला आया है। जहाँ सुनरख गांव के एक युवक ने खुद का ही ऑपरेशन कर डाला। आपको बतादें कि युवक लंबे समय से पेट दर्द से परेशान था जिसके चलते युवक ने इस कारनामे को YouTube देखकर अंजाम दे  दिया। इतना ही नहीं ऑपरेशन के बाद युवक ने खुद को 11 टांके भी लगा लिए। समस्या बढ़ जाने पर युवक को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। मामले की गंभीरता देखते हुए डॉक्टरों ने उसे आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया है।

मिली जानकारी के अनुसार वृंदावन के सुनरख गांव निवासी  32 वर्षीय राजा बाबू पिछले कई दिनों से पेट दर्द से परेशान था। कई बार इलाज कराने के बाद भी उसे आराम नहीं हुआ । ऐसे में उसने यू-ट्यूब से पेट के ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले जरूरी सामानों  की जानकारी ली और मेडिकल स्टोर से सर्जिकल ब्लेड, बेहोशी का इंजेक्शन, टांके लगाने की सुई सहित अन्य सामान खरीद लाया ।

जिसके बाद घर पर ही राजा ने इंजेक्शन लगाकर खुद को सुन्न किया और फिर सर्जिकल ब्लेड से अपना पेट चीर दिया। पेट का ऑपरेशन करने के बाद उसने प्लास्टिक के धागे से 11 टांके लगा लिए। एनेस्थिसिया का असर कम होने पर उसकी तकलीफ बढ़ गई और आनन-फानन में उसे परिजनों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने फर्स्ट एड देने के बाद राजा को आगरा एसएन अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

रामनवमी से पहले तैयारियों का जायजा लेंगे मुख्यमंत्री

सर्वोदय अयोध्या :-  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को एकदिवसीय दौरे पर अयोध्या पहुंचेंगे। वह तकरीबन पांच घंटे तक रामनगरी में रहेंगे। दर्शन-पूजन के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे और अयोध्या के विकास के साथ-साथ रामनवमी की तैयारियों को लेकर अफसरों के साथ मंथन करेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह करीब साढ़े नौ बजे अयोध्या पहुंचेंगे। वे सबसे पहले हनुमानगढ़ी, फिर श्रीरामलला के दर्शन पूजन करेंगे। इसके उपरांत राजसदन में लिटरेचर फेस्टिवल में शामिल होंगे। इसके बाद रामकथा पार्क में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के अंतर्गत संयुक्त क्रेडिट कार्ड कैम्प में शामिल होकर प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। यहां से आयुक्त कार्यालय सभागार पहुंचकर समीक्षा बैठक करेंगे। इसके बाद प्रयागराज मार्ग स्थित लधानी ग्रुप ऑफ कम्पनीज के बॉटलिंग प्लांट का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से लखनऊ प्रस्थान कर जाएंगे।

1100 से अधिक को देंगे ब्याज मुक्त ऋण
सीएम योगी मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के अंतर्गत रामकथा पार्क में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अयोध्या मंडल के 11 सौ से अधिक पात्रों को लगभग 50 करोड़ का ब्याज मुक्त ऋण प्रदान करेंगे। दरअसल युवाओं को उद्यम की तरफ उन्मुख कर उन्हें स्वावलंबी और रोजगार प्रदाता बनाने की सीएम की यह दूरदर्शी व महत्वाकांक्षी योजना है। यह योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में भी है। इसे 24 जनवरी को लांच किया गया था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अधिकारियों के साथ रामनवमी मेले में देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर बैठक करेंगे। इसकी तैयारी आदि को लेकर दिशा-निर्देश देंगे। रामलला की प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरी रामनवमी होगी, जिसमें भगवान श्री रामलला के ललाट पर भगवान सूर्य की किरण पड़ेंगी।

सात दारोगाओं का हाथ-पैर तुड़वाया”: संजय निषाद के बयान से UP में सियासी तूफान!

सर्वोदय (लखनऊ):- उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद का हर वक़्त किसी न किसी चर्चा में बने रहते है कभी विवादित ब्यान देकर तो कभी पोस्टर वॉर को लेकर पिछले बीते हुए विधानसभा उपचुनाव में भी संजय निषाद ने योगी सरकार को घेरा था क्यूंकि योगी जी ने निषाद पार्टी को एक भी सीट नहीं दी थी और उस पर संजय निषाद आगबबूला होकर पोस्टर वार शुरू कर दिए जगह जगह पोस्टर चिपकाय थे जिसमे लिखा था 27 का नारा निषाद है सहारा |वही अब एक वीडियो वायरल हो रही है जो सुल्तानपुर से आई है जो काफी  सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. पहले आप ये वीडियो सुने !

https://youtube.com/shorts/dGqs6u5EUvI?si=r-18I0bFmZUJVuEd

अपने इस वीडियो में वो सार्वजनिक मंच से बड़ी बात कबूल करते हुए सुनाई दे रहे हैं. मंत्री संजय निषाद ने मंच से कहा, मैंने 7 दारोगाओं के हाथ-पैर तुड़वाए, गड्ढे में फिंकवाया. उन्होंने आगे कहा, मैं यहां ऐसे ही नहीं पहुंचा हूं, सात दारोगा का हाथ-पैर तुड़वाकर और उनको गड्ढे में फेंकवाकर यहां तक पहुंचा हूं एक तरफ योगी जी कहते पुलिस वालो से कोई भी बट्टीमीजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी जो भी वर्दी धरियो के साथ गलत करेगा उसे बक्शा नहीं जायेगा लेकिन अब योगी के ही मंत्री संजय निषाद खुले मंच से ऐसा विवादित बयान दे रहे है की सात दारोगा का हाथ-पैर तुड़वाकर और उनको   फेंकवाकर यहां तक पहुंचा हूं क्या ये सीधा सीधा 2027 चुनाव के लिए अपने ही योगी सरकार को धमकी दे रहे है !क्या है इसके पीछे का राज ये तो आने वाले वक़्त ही बताएगा !

अब आपको बता दे की संजय निषाद सुल्तानपुर पहुंचे. इस दौरान मंत्री ने आरोप लगाया कि उनके समुदाय के कई लोगों को फर्जी केस में फंसाया गया है. उन्होंने पुलिसवालों से यहां तक कहा कि हमारे लड़कों के ऊपर से सारे फर्जी केस हटाओ, नहीं तो आंदोलन होगा, दारोगा सस्पेंड हो जाएंगे, मुख्यमंत्री तक से शिकायत करूंगा. मैं ऐसे ही यहां तक नहीं पहुंचा हूं, कई दारोगाओं का हाथ-पैर तुड़वाकर पहुंचा हूं. अब उनके इसी बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.मंत्री ने आगे कहा कि जरूरत हुआ तो दारोगा के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई करेंगे

भ्रष्टाचार के खिलाफ सीएम योगी का बड़ा एक्शन, IAS अभिषेक प्रकाश सस्पेंड

सर्वोदय (लखनऊ):- उत्तर प्रदेश प्रशासनिक ढांचे में एक बड़े झटके के रूप में सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को निलंबित किया जाना दर्शाता है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर सख्ती से अमल कर रही है। आपको बतादें कि  IAS अभिषेक प्रकाश लंबे समय तक लखनऊ के डीएम रह चुके हैं।

यह  कदम डिफेंस कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद उठाया गया है। 2006 बैच के आईएएस अफसर और औद्योगिक विकास विभाग के सचिव, साथ ही इन्वेस्ट यूपी के CEO अभिषेक प्रकाश पर यह कार्रवाई की गई है।लखनऊ डिफेंस एक्सपो जमीन घोटाले में भ्रष्टाचार और फर्जी दस्तावेजों के आरोप सामने आए हैं। यह मामला भटगांव में डिफेंस कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ा है। मुआवजे के नाम पर अनियमितताओं के चलते तत्कालीन लखनऊ डीएम IAS अभिषेक प्रकाश को निलंबित किया गया है। इसकी जांच भी की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, लखनऊ डिफेंस एक्सपो जमीन घोटाले में भ्रष्टाचार और फर्जी दस्तावेजों के आरोप के चलते कार्रवाई की गई है। लखनऊ के सरोजनीनगर स्थित भटगांव में डिफेंस कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ा ये मामला है। मुआवजे के नाम पर अनियमितताओं के चलते तत्कालीन लखनऊ के डीएम अभिषेक प्रकाश के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई है।

लखनऊ के जिलाधिकारी रह चुके है। उनके डीएम रहते हुए सरोजनीनगर क्षेत्र में डिफेंस कॉरिडोर की जमीन का अधिग्रहण हुआ था। बताया जा रहा है कि उस अधिग्रहण में पट्टे फर्जी पाए गए थे। इसमें करीब 90 पट्टे फर्जी पाए गए थे। उन पट्टों को संक्रमणीय भूमिधर जमीन घोषित कर करके मुआवजा उठाया गया था। इसके जरिये मोटी रकम मुआवजा उठाया गया था। इस मामले में कई शिकायतें हुई थी।

मिली जानकारी के मुताबिक, राजस्व परिषद के चेयरमैन रजनीश दुबे ने इस मामले में एक जांच की थी। जिसमें उन्होंने तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश, एडीएम अमरपाल, एसडीएम, कानूनगो और लेखपाल समेत कई अधिकारियों को आरोपी बनाया गया था। गुरुवार को इसी मामले में बहुत बड़ी कार्रवाई हुई है। योगी सरकार ने सचिव स्तर के अधिकारी अभिषेक प्रकाश को सस्पेंड कर दिया है। इस तरह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर भ्रष्टाचार में मामले में नजीर पेश करने वाली कार्रवाई कर दी है। आईएएस अभिषेक प्रकाश एलडीए के वीसी और लखनऊ डीएम के पद पर एक साथ तैनात रह चुके हैं। अभिषेक प्रकाश सरकार के खास होने के चलते काफी समय तक लखनऊ के जिलाधिकारी रहे चुके हैं।