सम्राट चौधरी के शपथ लेते ही ‘बुलडोजर बाबा’ के नारे, क्या बिहार में लागू होगा योगी मॉडल?

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- पटना में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही सम्राट चौधरी के समर्थकों ने “बुलडोजर बाबा जिंदाबाद” के नारे लगाए, जिसके बाद राज्य की राजनीति में ‘योगी मॉडल’ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बिहार में पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सख्ती को लेकर नई उम्मीदें और सवाल दोनों सामने आ रहे हैं।

‘योगी मॉडल’ की चर्चा क्यों?

राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या बिहार में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तर्ज पर सख्त प्रशासनिक मॉडल लागू किया जाएगा। ‘योगी मॉडल’ आमतौर पर अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने और पुलिस को सख्त रुख अपनाने की नीति से जोड़ा जाता है।

सम्राट चौधरी का सख्त रुख

गृह मंत्री रहते हुए सम्राट चौधरी पहले भी अपराधियों के खिलाफ कड़े बयान देते रहे हैं। अब मुख्यमंत्री बनने के बाद माना जा रहा है कि राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। हाल के महीनों में बिहार पुलिस द्वारा अपराधियों के खिलाफ अभियान और मुठभेड़ों में तेजी देखी गई है, हालांकि गंभीर अपराध अब भी चुनौती बने हुए हैं।

अतिक्रमण पर कार्रवाई तेज

पिछले कुछ महीनों में पटना समेत कई जिलों में अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई तेज की है। सीमावर्ती इलाकों में भी अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा भी इस दिशा में सख्ती के संकेत दिए गए हैं। नई सरकार के गठन के बाद इन कार्रवाइयों में और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।

पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री

करीब दो दशकों से बिहार की सत्ता में साझेदार रही भाजपा को पहली बार राज्य का नेतृत्व करने का मौका मिला है। इससे पहले एनडीए सरकार की कमान नीतीश कुमार के हाथों में रही थी। अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में भाजपा सीधे शासन की जिम्मेदारी संभाल रही है।

विपक्ष का विरोध

विपक्षी दलों ने ‘बुलडोजर राजनीति’ को लेकर चिंता जताई है। सीपीआई (माले) ने आरोप लगाया कि भाजपा बिहार को “बुलडोजर राज” की ओर ले जाना चाहती है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्य में ऐसी नीतियों का विरोध किया जाएगा और लोकतांत्रिक तरीके से इसका सामना किया जाएगा।

समर्थन और आलोचना दोनों

जहां भाजपा समर्थक ‘योगी मॉडल’ को प्रभावी कानून-व्यवस्था का उदाहरण बताते हैं, वहीं विपक्ष, अदालतों और मानवाधिकार संगठनों ने इस मॉडल की आलोचना भी की है। उनका कहना है कि ऐसी कार्रवाइयों में संवैधानिक प्रक्रियाओं और मानवाधिकारों का ध्यान रखना जरूरी है।

नई सरकार के शुरुआती संकेतों ने साफ कर दिया है कि बिहार की राजनीति में आने वाले समय में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सख्ती सबसे बड़ा मुद्दा रहने वाला है।

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