नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद Delhi High Court ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो को हटवाया जाए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत ने स्पष्ट किया कि कोर्ट की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग करना और उसे सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर साझा करना नियमों के खिलाफ है।
कोर्ट ने क्यों दिया आदेश?
हाई कोर्ट के एक अधिकारी ने बताया कि बिना अनुमति अदालत की कार्यवाही रिकॉर्ड करना अवैध है। दिल्ली हाई कोर्ट के नियमों के तहत किसी भी सुनवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग और उसका प्रकाशन प्रतिबंधित है।
अधिकारी के अनुसार, जिन लोगों ने यह वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। कोर्ट ने पहले भी ऐसे मामलों में सख्ती दिखाई है।
क्या है वीडियो विवाद?
दरअसल, 14 अप्रैल को Arvind Kejriwal हाई कोर्ट में पेश हुए थे। सुनवाई के दौरान उन्होंने करीब एक घंटे तक खुद अपनी दलीलें रखीं और जस्टिस Swarna Kanta Sharma के सामने अपनी आपत्तियां भी जाहिर कीं।
सुनवाई के बाद आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर दिए। इसके बाद यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया और कुछ यूजर्स ने इस पर मीम्स भी बनाए।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला कथित शराब नीति घोटाले से जुड़ा है। निचली अदालत ने 27 फरवरी को Arvind Kejriwal, Manish Sisodia और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था।
हालांकि, Central Bureau of Investigation (CBI) ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले की सुनवाई फिलहाल जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच में चल रही है।
केजरीवाल ने इस केस को किसी अन्य जज को ट्रांसफर करने की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र भी लिखा था, लेकिन मांग खारिज होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की।