न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- देश में प्रस्तावित महिला आरक्षण कानून को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सरकार 16 अप्रैल से शुरू होने वाले तीन दिवसीय विशेष सत्र में संशोधन विधेयक पारित कराने की तैयारी में है। इस प्रस्ताव के तहत महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की योजना है, जिसके लिए लोकसभा और विधानसभा सीटों का परिसीमन भी किया जाएगा।
क्या है सरकार की योजना?
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, महिला आरक्षण लागू करने से पहले सीटों का पुनर्निर्धारण (परिसीमन) होगा। इसके तहत लोकसभा और विधानसभा सीटों में लगभग 50% तक बढ़ोतरी की जा सकती है। उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश की 80 सीटें बढ़कर 120 और महाराष्ट्र की 48 से बढ़कर 72 हो सकती हैं।
समर्थन के बावजूद क्यों उठ रहे सवाल?
महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष का सैद्धांतिक समर्थन साफ नजर आता है, लेकिन कई दल परिसीमन के मुद्दे पर असहमत हैं। कांग्रेस नेता Sonia Gandhi का कहना है कि पहले नई जनगणना पूरी होनी चाहिए, उसके बाद ही इस कानून को लागू किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि जल्दबाजी में लिया गया फैसला राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
परिसीमन बना विवाद की जड़
विपक्षी दलों को आशंका है कि परिसीमन से कुछ राज्यों की राजनीतिक ताकत बढ़ सकती है, जबकि कुछ राज्यों का प्रतिनिधित्व घट सकता है। Brinda Karat सहित वाम दलों के नेताओं का कहना है कि 2010 में राज्यसभा से पारित महिला आरक्षण विधेयक को ही लागू किया जाए, जिसमें परिसीमन का प्रावधान नहीं था।
सर्वदलीय बैठक की मांग
Sonia Gandhi ने सुझाव दिया है कि आगामी चुनावों के बाद सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए, ताकि सभी दलों की राय लेकर आगे बढ़ा जा सके। उनका यह भी कहना है कि मुख्य चिंता अब केवल महिला आरक्षण नहीं, बल्कि संवैधानिक संतुलन बनाए रखने की है।
दक्षिण भारत को लेकर भी चिंता
वामपंथी नेताओं ने खासतौर पर दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि परिसीमन का असर इन राज्यों पर कैसे पड़ेगा।