न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चली अहम वार्ता करीब 21 घंटे तक जारी रहने के बाद बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर चर्चा तो हुई, लेकिन किसी भी ठोस समझौते पर सहमति नहीं बन सकी।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बातचीत के बाद कहा कि इस वार्ता से जुड़ी एक अच्छी और एक बुरी खबर है। उनके मुताबिक, सकारात्मक पक्ष यह है कि दोनों देशों ने अहम मुद्दों पर खुलकर बातचीत की, लेकिन नकारात्मक पहलू यह रहा कि कोई समझौता नहीं हो सका। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान के सामने “फाइनल और बेस्ट ऑफर” रख दिया है, जिसे मानना या ठुकराना अब ईरान पर निर्भर है।
वहीं ईरान ने वार्ता विफल होने के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। ईरानी सरकारी प्रसारक के मुताबिक, उनके प्रतिनिधिमंडल ने पूरी सकारात्मकता के साथ बातचीत की, लेकिन अमेरिका की “बेवजह और फालतू मांगों” के कारण वार्ता में रुकावट आई और अंततः कोई नतीजा नहीं निकल सका।
परमाणु मुद्दे पर अड़चन
जेडी वेंस ने साफ कहा कि अमेरिका की मुख्य चिंता ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। उनका कहना है कि ईरान परमाणु हथियारों पर रोक लगाने के लिए तैयार नहीं है, जो कि अमेरिका के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। इसी वजह से बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई।
ट्रंप से कई बार संपर्क
वार्ता के दौरान वेंस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कई बार बातचीत की। यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही थी क्योंकि करीब 47 साल बाद इस स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच सीधे संवाद हुआ था।
अमेरिकी टीम में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के सलाहकार जारेड कुशनर भी शामिल थे। वहीं ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने हिस्सा लिया।
हालांकि, बातचीत बेनतीजा रही, लेकिन अमेरिका ने यह संकेत जरूर दिया है कि अगर ईरान उसके प्रस्ताव को स्वीकार करता है तो आगे भी समझौते की संभावनाएं बनी रह सकती हैं।