न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर चल रही अटकलों के बीच बड़ा राजनीतिक बयान सामने आया है। योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष Sanjay Nishad ने पहली बार साफ तौर पर कहा है कि राज्य में पंचायत चुनाव अब 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जाने की संभावना है।
इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है, खासकर उन नेताओं और उम्मीदवारों के बीच जो पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटे थे।
चुनाव टलने के पीछे क्या वजह?
संजय निषाद ने बताया कि पंचायत चुनाव एक संवैधानिक प्रक्रिया है और फिलहाल मामला Allahabad High Court में विचाराधीन है। जब तक आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक चुनाव कराना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग और महिलाओं के आरक्षण को लेकर गणना और व्यवस्था अभी बाकी है। ऐसे में बिना आरक्षण तय किए चुनाव कराना कानूनी रूप से संभव नहीं होगा।
‘पार्टी में बढ़ सकती है अंदरूनी कलह’
मंत्री ने एक अहम राजनीतिक कारण का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, अगर विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव होते हैं, तो पार्टियों के भीतर ही टकराव बढ़ सकता है।
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संजय निषाद ने कहा कि पंचायत चुनाव में एक ही पार्टी के कई उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं। ऐसे में जो जीतता है, उसे पार्टी स्वीकार कर लेती है, लेकिन बाकी उम्मीदवार नाराज हो जाते हैं। इससे गुटबाजी बढ़ती है और इसका असर विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है।
Om Prakash Rajbhar के भी बदले सुर
इस मुद्दे पर अब पंचायती राज मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर के रुख में भी बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां वे समय पर चुनाव कराने की बात कर रहे थे, अब उन्होंने भी कोर्ट के फैसले का इंतजार करने की बात कही है।
विपक्ष में भी हलचल
इस बयान के बाद विपक्षी दलों में भी रणनीतिक हलचल बढ़ गई है। माना जा रहा है कि सरकार पंचायत चुनाव टालकर पूरी ताकत 2027 के विधानसभा चुनाव पर केंद्रित करना चाहती है।
हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय संभावित उम्मीदवारों के लिए यह खबर बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि वे लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे थे।



