Tuesday, March 31, 2026

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Rinku Singh Rahi: आटा चक्की चलाने वाले के बेटे से IAS तक का सफर, इस्तीफा देने वाले रिंकू सिंह की कहानी

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के आईएएस अधिकारी Rinku Singh Rahi ने अपने पद से इस्तीफा देकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। उनका कहना है कि लंबे समय से उन्हें कोई ठोस जिम्मेदारी नहीं दी जा रही थी, जिससे वे सक्रिय रूप से जनसेवा नहीं कर पा रहे थे।

“वेतन मिल रहा था, लेकिन काम नहीं”

राही के अनुसार, उन्हें राजस्व परिषद में अटैच रखा गया था, जहां न तो स्पष्ट भूमिका थी और न ही कोई प्रभावी जिम्मेदारी। उन्होंने साफ कहा कि केवल वेतन मिलने से संतोष नहीं होता, बल्कि सेवा का अवसर मिलना जरूरी है।

साधारण परिवार से निकले, बड़े मुकाम तक पहुंचे

Aligarh के एक सामान्य परिवार में जन्मे रिंकू सिंह राही के पिता आटा चक्की चलाते थे। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की, छात्रवृत्ति हासिल की और आगे बढ़ते हुए इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की।

इसके बाद उन्होंने Uttar Pradesh Public Service Commission (UPPSC) की परीक्षा पास कर 2008 में पीसीएस अधिकारी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की।

दोबारा परीक्षा देकर बने IAS

प्रशासनिक सेवा में रहते हुए भी उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। Union Public Service Commission (UPSC) की परीक्षा दोबारा दी और 2021 में 683वीं रैंक हासिल कर आईएएस बने।

वायरल वीडियो से भी रहे सुर्खियों में

रिंकू सिंह राही उस समय चर्चा में आए जब Shahjahanpur में उनका एक वीडियो वायरल हुआ। इस वीडियो में वे वकीलों के बीच खुद कान पकड़कर उठक-बैठक करते नजर आए। यह कदम उन्होंने एक विवाद को शांत करने के लिए उठाया था, जिससे उन्होंने यह संदेश दिया कि कानून सबके लिए समान है।

घोटाले का खुलासा, झेली जानलेवा हमला

साल 2009 में Muzaffarnagar में समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए उन्होंने 83 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया था। इसके बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ और उन्हें सात गोलियां मारी गईं, जिससे उनका चेहरा गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और सेवा जारी रखी।

सेवा में उतार-चढ़ाव के बीच कायम रही निष्ठा

हाल के महीनों में उन्हें Powayan तहसील में एसडीएम की जिम्मेदारी दी गई थी। यहां भी एक निरीक्षण के दौरान हुई कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जिसे उन्होंने खुद सामने आकर शांत किया।

रिंकू सिंह राही की कहानी संघर्ष, साहस और सेवा के जज्बे की मिसाल है। वहीं उनका इस्तीफा प्रशासनिक व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर रहा है।

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