न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- सोने की कीमतों में इन दिनों भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। “सेफ हेवन” माने जाने वाला सोना इस हफ्ते करीब 40 साल की सबसे बड़ी गिरावट के दौर से गुजरा है। हैरानी की बात यह है कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद सोने में तेजी नहीं आई, बल्कि इसमें तेज गिरावट दर्ज की गई।
इस सप्ताह सोने की कीमतों में 11% से अधिक की गिरावट आई, जो 1983 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है। शुक्रवार को सोना लगभग 3.1% टूटकर $4,508 प्रति औंस के आसपास पहुंच गया और लगातार कई दिनों से दबाव में बना हुआ है।
क्यों गिर रही हैं सोने की कीमतें?
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों में बढ़ोतरी है। डॉलर मजबूत होने से अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घटती है।
इसके अलावा, मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है। ऐसे में निवेशक सोने की बजाय अन्य एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं।
हाल के दिनों में निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) भी कीमतों में गिरावट का बड़ा कारण बनी है। साथ ही गोल्ड ETF से लगातार निवेश निकलना कमजोर मांग का संकेत दे रहा है।
क्या और गिरेगा सोना?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। यदि कीमतें $4,400 के नीचे फिसलती हैं, तो यह गिरावट $3,800 से $4,000 के स्तर तक भी जा सकती है।
हालांकि, लंबी अवधि के नजरिए से सोना अब भी मजबूत निवेश विकल्प माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि गिरावट के दौरान धीरे-धीरे निवेश करना (बाय ऑन डिप्स) समझदारी भरी रणनीति हो सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
निवेशकों को मौजूदा गिरावट में घबराकर जल्दबाजी में बिक्री करने से बचना चाहिए। इसके बजाय, चरणबद्ध तरीके से निवेश करना बेहतर हो सकता है। साथ ही, वैश्विक आर्थिक हालात, अमेरिकी डॉलर की चाल और ब्याज दरों पर नजर बनाए रखना जरूरी है।
कुल मिलाकर, शॉर्ट टर्म में सोना दबाव में रह सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में यह अब भी सुरक्षित निवेश के तौर पर अपनी जगह बनाए हुए है।



