न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। University Grants Commission (यूजीसी) के निर्देश पर अब छात्रों का Ayushman Bharat Digital Health Mission (एबीडीएम) के तहत Ayushman Bharat Health Account (ABHA) बनाया जाएगा।
इस हेल्थ अकाउंट के जरिए छात्रों की पूरी मेडिकल हिस्ट्री डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगी, जिसे डॉक्टर जरूरत पड़ने पर आसानी से देख सकेंगे।
एक क्लिक में दिखेगी पूरी मेडिकल हिस्ट्री
योजना के तहत सभी छात्रों का हेल्थ अकाउंट Hospital Management Information System (HIMS) से जोड़ा जाएगा। इसके बाद छात्र अगर कॉलेज की क्लीनिक या किसी बड़े अस्पताल में इलाज कराने जाएंगे, तो डॉक्टर उनके पिछले इलाज और जांच की पूरी जानकारी एक क्लिक में देख सकेंगे।
इलाज और जांच का पूरा रिकॉर्ड रहेगा सुरक्षित
अब तक विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों की डिस्पेंसरी में छात्रों का इलाज तो होता था, लेकिन उसका कोई स्थायी मेडिकल रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद HIMS सॉफ्टवेयर के जरिए छात्रों के इलाज, दवाओं और पैथोलॉजी जांच का पूरा डेटा ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। इससे छात्रों को मेडिकल रिकॉर्ड के कागजात साथ रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
ई-सुश्रुत क्लीनिक से मिलेगी ऑनलाइन ओपीडी सुविधा
इस योजना के तहत संस्थानों में ई-सुश्रुत क्लीनिक प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसकी मदद से छात्रों को छोटे क्लीनिकों में भी ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और ओपीडी सेवाएं आसानी से मिल सकेंगी।
यह सिस्टम डॉक्टरों को भी बेहतर तरीके से इलाज करने में मदद करेगा, क्योंकि मरीज की पिछली मेडिकल जानकारी तुरंत उपलब्ध होगी।
हर संस्थान में होगा नोडल अधिकारी
योजना को सही तरीके से लागू करने के लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय और कॉलेज में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी हेल्थ अकाउंट और डिजिटल सिस्टम के संचालन की निगरानी करेगा।
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इस प्लेटफॉर्म को National Health Authority (NHA) और Centre for Development of Advanced Computing (C-DAC) ने मिलकर तैयार किया है।
छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा
इस डिजिटल हेल्थ सिस्टम के लागू होने से छात्रों को कई फायदे मिलेंगे:
- मेडिकल हिस्ट्री हमेशा ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी
- इलाज के दौरान डॉक्टर को पूरी जानकारी तुरंत मिल सकेगी
- पैथोलॉजी रिपोर्ट और इलाज का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा
- अस्पताल या डॉक्टर बदलने पर भी रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध रहेगा
सरकार का मानना है कि इस पहल से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को बेहतर और तेज स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।



