पता नहीं कहां से कुत्ता ले आए…उत्तर प्रदेश विधानसभा में गरमाई बहस, नेता प्रतिपक्ष का सरकार पर तंज

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में उस वक्त ठहाके गूंज उठे, जब नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार पर तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने उच्च शिक्षा के मुद्दे को उठाते हुए ग्रेटर नोएडा स्थित गल्गोटियास विश्वविद्यालय पर निशाना साधा और कहा, “पता नहीं कहां से कुत्ता ले आए और कह दिया कि हमने बनाया है।” उनके इस बयान के बाद सदन में हल्की हंसी और शोरगुल का माहौल बन गया।

निजी विश्वविद्यालयों पर उठाए सवाल

माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय फीस लेता है, लेकिन निजी विश्वविद्यालयों में फीस संरचना काफी अधिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना शिक्षा के विस्तार के लिए नहीं, बल्कि पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने याद दिलाया कि जब ऐसे विश्वविद्यालयों को मान्यता देने का विधेयक आया था, तब उन्होंने इसका विरोध किया था।

मुख्यमंत्री से हल्की नोकझोंक

बहस के दौरान उन्होंने राजस्व संहिता का जिक्र करते हुए कहा कि इसके निर्माण में शिवपाल सिंह यादव की भी भूमिका रही है।

इसी दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर मुस्कुराते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री को प्रसन्न रहना चाहिए, क्योंकि झंझावात बहुत हैं।” इस पर सदन का माहौल कुछ देर के लिए हल्का हो गया।

वित्तीय प्रबंधन और कर्ज पर हमला

नेता प्रतिपक्ष ने राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर भी सरकार को घेरा। उनका दावा था कि प्रदेश पर नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है और बजट में वास्तविक वित्तीय स्थिति स्पष्ट नहीं की जा रही। इस पर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने आपत्ति भी जताई।

स्वास्थ्य और शिक्षा पर चिंता

माता प्रसाद पांडेय ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिला अस्पतालों से मरीजों को बड़े संस्थानों में रेफर करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने डॉक्टरों की कमी, दवाओं की अनुपलब्धता और आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर चिंता जताई।

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साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों—जैसे इकाना स्टेडियम, लोक भवन और पुलिस मुख्यालय—का उल्लेख करते हुए वर्तमान सरकार को एक्सप्रेसवे के अलावा अन्य बड़े विकास कार्य गिनाने की चुनौती दी।

बजट सत्र के दौरान चली इस बहस ने शिक्षा, स्वास्थ्य और वित्तीय प्रबंधन जैसे मुद्दों को फिर से राजनीतिक केंद्र में ला दिया है।

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