भाजपा की सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ? सपा मुखिया अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग और भाजपा पर बोला जोरदार हमला

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोमवार को लखनऊ  में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग (Election Commission of India) और भाजपा (Bharatiya Janata Party) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि जहां-जहां समाजवादी पार्टी को जीत मिली थी, वहां सुनियोजित तरीके से मतदाता सूची से नाम कटवाए जा रहे हैं।

फर्जी फॉर्म-7 के जरिए नाम कटवाने का आरोप

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से बड़ी संख्या में फॉर्म-7 भरकर सैकड़ों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के बीएलओ तक के नाम सूची से हटा दिए गए। औरैया के विधुना क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने दावा किया कि वहां एक बीएलओ द्वारा 126 वोट कटवाए गए। इसके अलावा एक विधायक की पत्नी और अयोध्या में कई मतदाताओं के नाम हटाए जाने की बात भी उन्होंने कही।

उन्होंने आरोप लगाया कि “अज्ञात” लोगों द्वारा एक लाख से अधिक फॉर्म-7 भरे गए, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से केवल 47 फॉर्म-7 दाखिल किए गए। उनका कहना था कि यह पूरी प्रक्रिया संदिग्ध है और इससे निष्पक्ष चुनाव पर सवाल खड़े होते हैं।

आयोग पर उठाए सवाल, कोर्ट जाने के संकेत

सपा प्रमुख ने कहा कि चुनाव आयोग ने विपक्ष को अनावश्यक कार्यों में उलझा दिया है। उन्होंने सवाल किया कि जब उनके ही नगर अध्यक्ष के हस्ताक्षर से उनके समर्थक का वोट काट दिया गया, तो यह कैसे संभव हुआ। उन्होंने संकेत दिए कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो अदालत का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। साथ ही बताया कि सपा विधायक चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखेंगे।

मुख्यमंत्री पर साधा निशाना

अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री Yogi Adityanath पर भी परोक्ष रूप से निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि यादव और मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं के नाम अधिक संख्या में हटाए गए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए मुख्यमंत्री के भाषण को “अमृतवाणी” बताया।

सामाजिक न्याय और जातीय जनगणना की मांग

प्रेस वार्ता में अखिलेश यादव ने जातीय जनगणना की मांग दोहराई और कहा कि आबादी के अनुपात में सभी को अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाकर “सामाजिक न्याय का राज” स्थापित करना चाहती है।

इसके अलावा उन्होंने नोटबंदी, किसान आंदोलन और निवेश जैसे मुद्दों पर भी भाजपा सरकार की नीतियों की आलोचना की। शंकराचार्य के संदर्भ में उन्होंने कहा कि धार्मिक पदों का सम्मान होना चाहिए और जो लोग प्रमाण मांग रहे हैं, उन्हें पहले स्वयं पारदर्शिता दिखानी चाहिए।

सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव जीतने में असफल रहने के कारण मतदाता सूची में हेरफेर कर रही है और बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

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