न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश की राजनीति में शंकराचार्य को लेकर दिए गए बयान पर नया विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने विधानसभा में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
अखिलेश यादव ने कहा कि परम पूज्य शंकराचार्य के बारे में अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना “शाब्दिक हिंसा” है और यह पाप की श्रेणी में आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं और राजनीतिक अहंकार को दर्शाते हैं।
‘ताली बजाने वाले भी पाप के भागीदार’
सपा प्रमुख ने कहा कि महाकुंभ के दौरान हुई मौतों के सही आंकड़े और मुआवजे को लेकर पारदर्शिता नहीं दिखाई गई। ऐसे में किसी धार्मिक पद या परंपरा पर टिप्पणी करने का नैतिक अधिकार सरकार को नहीं है।
उन्होंने भाजपा विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा कि सदन में ताली बजाने वाले भी जनता के बीच जवाबदेह होंगे। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि जब अहंकार हावी होता है तो भाषा और व्यवहार बदल जाता है, जिसका असर सामाजिक प्रतिष्ठा पर पड़ता है।
योगी का क्या था बयान?
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद अत्यंत पवित्र और सर्वोच्च है, और हर कोई स्वयं को शंकराचार्य नहीं कह सकता।
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मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कानून का शासन सर्वोपरि है और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। माघ मेले और मौनी अमावस्या के दौरान प्रशासनिक व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारी भीड़ के बीच व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता थी और किसी को भी अव्यवस्था फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
सरकार की ओर से पलटवार
योगी सरकार में मंत्री Sanjay Nishad ने भी अखिलेश यादव पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अखिलेश अब केवल बयानबाजी और पोस्टरबाजी तक सीमित रह गए हैं। निषाद ने दावा किया कि वर्तमान सरकार संत-महात्माओं को पूरा सम्मान देती है।



