न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर बड़ा बयान दिया है। शनिवार को अलीगढ़ में मीडिया से बातचीत के दौरान राजभर ने कहा कि यदि शंकराचार्य को राजनीति ही करनी है, तो उन्हें खुलकर मैदान में उतरना चाहिए और किसी राजनीतिक दल को ज्वाइन कर जनता के बीच जाना चाहिए।
राजभर ने कहा कि साधु-संतों को राजनीतिक दलों की तरह भूमिका निभाना शोभा नहीं देता। उनका काम समाज में भाईचारा, शांति और सद्भाव बनाए रखना है, न कि “पार्टीबंदी” की राजनीति करना।
‘धर्मगुरु की जगह निभा रहे विपक्ष की भूमिका’
ओपी राजभर ने आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इन दिनों धर्मगुरु की भूमिका से हटकर विपक्ष जैसा व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के खिलाफ जिस तरह की बयानबाजी की जा रही है, वह उचित नहीं है।
माघ मेले के विवाद के बाद बयान
राजभर का यह बयान प्रयागराज माघ मेले में हुए विवाद के बाद आया है। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या स्नान के लिए जा रही शंकराचार्य की पालकी को पुलिस ने रोक दिया था।
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इस दौरान शिष्यों के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद शंकराचार्य उसी स्थान पर 11 दिनों तक धरने पर बैठे रहे, जहां पुलिस ने उन्हें रोका था। 28 जनवरी को वह माघ मेला छोड़कर काशी रवाना हो गए।
अन्य मंत्रियों के भी तीखे बयान
इधर, बरेली में पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने भी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि गोकशी के मुद्दे पर शंकराचार्य “सफेद झूठ” बोल रहे हैं और कथित गोकशों के दबाव में प्रदेश में भ्रम और अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
योगी सरकार का रुख
इससे पहले योगी सरकार ने स्पष्ट किया था कि शंकराचार्य कोई संवैधानिक या सरकारी पद नहीं है, बल्कि यह मठों और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा विषय है। सरकार ने कहा कि जो व्यक्ति धार्मिक पद की आड़ में जनता के बीच भ्रम फैलाएगा, उसे मान्यता नहीं दी जाएगी।
माघ मेला छोड़ने के बाद शंकराचार्य ने वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर हमले जारी रखे थे और मुख्यमंत्री से “हिंदू होने का प्रमाण” देने तक की बात कही थी।



