न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में शनि, राहु, केतु या अन्य अशुभ ग्रह-नक्षत्र जीवन में अनेक तरह की परेशानियां लेकर आते हैं। इन ग्रहों के प्रभाव से व्यक्ति को मानसिक तनाव, आर्थिक रुकावट, स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें और पारिवारिक अशांति का सामना करना पड़ता है। हालांकि वृंदावन के संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का कहना है कि ग्रह-नक्षत्र चाहे जितने भी प्रतिकूल हों, राधा नाम की शक्ति से उनका प्रभाव समाप्त किया जा सकता है।
महाराज जी अपने प्रवचनों में बार-बार यह दोहराते हैं कि जब भगवान का संबल मिल जाता है, तब कोई भी ग्रह मनुष्य का अहित नहीं कर सकता। उनका प्रसिद्ध वाक्य है— “जानकी नाथ सहाय करे, जब कौन बिगाड़ करे नर तेरो”। यानी जब ईश्वर साथ हों, तो कोई शक्ति बाधा नहीं बन सकती।
राधा नाम जप से कमजोर पड़ता है ग्रह-दोष
प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, ग्रहों का नकारात्मक असर सबसे पहले मन पर पड़ता है। इससे भय, चिंता और नकारात्मक विचार जन्म लेते हैं। लेकिन नियमित रूप से ‘राधे-राधे’ का जप करने से मन शुद्ध होता है और ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा स्वतः कमजोर हो जाती है। महाराज जी रोज कम से कम एक माला यानी 108 बार राधा नाम जप करने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि इससे शनि, राहु-केतु सहित अन्य दोषों का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है।
समर्पण और विनम्रता है सबसे बड़ा कवच
महाराज जी कहते हैं कि ग्रह-दोष का मूल कारण अहंकार और ‘मैं’ का भाव होता है। जब व्यक्ति स्वयं को कर्ता मानता है, तब ग्रहों का प्रभाव बढ़ता है। लेकिन जब वह यह स्वीकार कर लेता है कि सब कुछ भगवान की इच्छा से होता है, तब कोई ग्रह उसे नुकसान नहीं पहुंचा सकता। सुबह-शाम राधा-कृष्ण के चरणों में स्वयं को समर्पित करना और विनम्र भाव बनाए रखना ग्रह-दोष से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय माना गया है।
सत्संग और गुरु कृपा से मिलती है सुरक्षा
प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, सत्संग ग्रह-दोष निवारण का सबसे सशक्त माध्यम है। जब मन संसारिक उलझनों में भटकता है, तब ग्रहों का प्रभाव बढ़ जाता है। लेकिन सत्संग से मन ईश्वर में स्थिर रहता है और ग्रहों की पकड़ कमजोर हो जाती है। वहीं गुरु की कृपा से ग्रह-दोष का असर पूरी तरह समाप्त हो सकता है। महाराज जी गुरु और नाम-स्मरण को ग्रहों से भी बड़ी शक्ति बताते हैं।
सात्विक जीवन से मिलता है स्थायी समाधान
महाराज जी का कहना है कि ग्रह-दोष से स्थायी मुक्ति के लिए सात्विक जीवन जरूरी है। तामसिक भोजन, नशा, क्रोध, असत्य और नकारात्मक सोच से दूरी बनाकर रखने से मन शुद्ध रहता है। नियमित नाम जप, संयमित जीवनशैली और शुद्ध आचरण से व्यक्ति न केवल ग्रह-दोष से बचता है, बल्कि जीवन में शांति और संतुलन भी प्राप्त करता है।
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प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, ग्रह-नक्षत्र मनुष्य से बड़े नहीं होते। राधा नाम जप, पूर्ण समर्पण, सत्संग और सात्विक जीवन अपनाकर किसी भी प्रकार के ग्रह-दोष के प्रभाव को समाप्त किया जा सकता है। जो व्यक्ति भगवान पर भरोसा रखता है, उसके जीवन में अंततः सुख और सफलता ही आती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक व आध्यात्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पूर्ण सत्यता का दावा नहीं किया जाता। किसी भी निर्णय से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।



