Wednesday, March 25, 2026

Buy now

spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

मृत्यु से पहले ही निर्धारित हो जाता है अगला जन्म? जानिए कौन से कर्म दिलाते हैं निम्न या उच्च योनि

हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में से एक, गरुड़ पुराण, मृत्यु, पुनर्जन्म और कर्मफल के रहस्यों पर प्रकाश डालता है। इस पुराण के अनुसार, व्यक्ति का अगला जन्म मृत्यु से पहले ही उसके कर्मों के आधार पर निर्धारित हो जाता है। पिछले जन्मों के संचित कर्म, इस जन्म के प्रारब्ध कर्म और मृत्यु के समय अंतिम विचार मिलकर अगले जीवन का स्वरूप तय करते हैं।

गरुड़ पुराण में कुल 84 लाख योनियों का उल्लेख किया गया है, जिसमें मनुष्य की योनि को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। अच्छे कर्म करने वाले उच्च योनि प्राप्त करते हैं, जबकि बुरे कर्मों के कारण निम्न योनि या नरक भोग का सामना करना पड़ता है।

मृत्यु के समय अंतिम विचार अहम

गरुड़ पुराण में बताया गया है कि व्यक्ति का मृत्यु के समय आखिरी विचार (अंतिम चिंतन) उसके अगली जन्म को प्रभावित करता है। यदि मन अंत समय में ईश्वर या सात्विक भाव में केंद्रित है, तो उच्च लोक या श्रेष्ठ जन्म प्राप्त होता है। वहीं, यदि मन में पाप, क्रोध या लोभ भरा हो, तो निम्न योनि में जन्म लेना पड़ता है। यमराज कर्मों का लेखा-जोखा करके अगली योनि का निर्धारण करते हैं।

धर्म का अपमान करने वालों का अगला जन्म

यदि कोई व्यक्ति धर्म, वेद, पुराण या ईश्वर का अपमान करता है, नास्तिकता फैलाता है या पूजा-पाठ से दूर रहता है, तो गरुड़ पुराण के अनुसार उसका अगला जन्म कुत्ते के रूप में होता है। यह जीवन भर धर्म के प्रति अपराध करने का परिणाम माना गया है।

मित्र के साथ विश्वासघात करने वालों का भविष्य

जो लोग मित्रता में धोखा करते हैं, उनका अगला जन्म गिद्ध के रूप में होता है। गिद्ध की जीवनशैली दूसरों के मृत शरीर पर निर्भर होती है, जो मित्र के अपमान के फल के अनुरूप है।

दूसरों को मूर्ख बनाने और कष्ट पहुँचाने वाले

गरुड़ पुराण में उल्लू और बकरी के उदाहरण दिए गए हैं। जो लोग चालाकी से दूसरों को मूर्ख बनाते हैं, उनका अगला जन्म उल्लू के रूप में होता है। वहीं, जो लोग गाली-गलौज करते हैं और दूसरों को वाणी से चोट पहुँचाते हैं, उनका जन्म बकरी में होता है।

यह भी पढ़े:- लेस्बियन पत्नी ने महिला प्रेमी के साथ मिलकर कराई किसान पति की हत्या, 60 हजार में दी सुपारी

गरुड़ पुराण हमें यही संदेश देता है कि हमारे कर्म ही हमारे अगले जन्म को तय करते हैं। अच्छे कर्म, भक्ति, दान और सत्य का पालन करने से जीवन में उच्च योनि मिलती है, जबकि पाप और अपवित्र कर्म निम्न योनि की ओर ले जाते हैं।

नोट: इस आलेख में दी गई जानकारी सामान्य ज्ञान पर आधारित है। विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

1,388FansLike
133FollowersFollow
621SubscribersSubscribe
- Advertisement -[cricket_score]

Latest Articles