न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- कमोडिटी बाजार में सोमवार को ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली। MCX पर चांदी ने पहली बार ₹3 लाख प्रति किलोग्राम का आंकड़ा पार कर लिया, जबकि सोना भी जोरदार उछाल के साथ रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक स्तर पर बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव और ट्रेड वॉर की आशंका के चलते निवेशकों का रुझान तेजी से सुरक्षित निवेश यानी सेफ-हेवन एसेट्स की ओर बढ़ा है।
MCX पर चांदी का मार्च वायदा ₹13,550 यानी करीब 5 फीसदी से ज्यादा की तेजी के साथ ₹3,01,315 प्रति किलोग्राम के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया। बाजार में यह उछाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर टैरिफ की धमकी के बाद देखने को मिला, जिससे वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ गई।
सोने ने भी बनाया नया रिकॉर्ड
चांदी की तेजी का असर सोने की कीमतों पर भी साफ दिखा। MCX पर सोने का फरवरी वायदा लगभग ₹3,000 या 2 फीसदी से अधिक चढ़कर ₹1,45,500 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी रिकॉर्ड तेजी
ट्रेड वॉर की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने-चांदी ने नई ऊंचाइयों को छू लिया। ब्लूमबर्ग के अनुसार, सिंगापुर में सुबह 8:11 बजे तक स्पॉट गोल्ड 1.6 फीसदी की बढ़त के साथ 4,668.76 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि इससे पहले यह 4,690.59 डॉलर के शिखर को छू चुका था। वहीं चांदी 3.2 फीसदी चढ़कर 93.02 डॉलर प्रति औंस पर पहुंची और 94.12 डॉलर के उच्च स्तर तक गई।
आगे कहां तक जा सकती है चांदी
एनरिच मनीके के सीईओ पॉनमुदी आर का कहना है कि COMEX पर चांदी ने 93.7 डॉलर का उच्च स्तर छूने के बाद 89-90 डॉलर के दायरे में हल्का सुधार दिखाया है। यह तेजी के लंबे दौर के बाद मुनाफावसूली का संकेत है, न कि ट्रेंड बदलने का। उनके मुताबिक मजबूत औद्योगिक मांग और सप्लाई की कमी के चलते चांदी में गिरावट पर खरीदारी देखने को मिल रही है।
MCX पर चांदी के अहम स्तर
पॉनमुदी के अनुसार, MCX पर चांदी का भाव कंसॉलिडेशन के बावजूद अपने तेजी वाले ढांचे में बना हुआ है। 2,80,000 से 2,83,000 रुपये का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। अगर कीमतें 2,95,000 रुपये के ऊपर टिकती हैं, तो चांदी 3,05,000 से 3,20,000 रुपये के स्तर की ओर तेजी से बढ़ सकती है।
तकनीकी नजरिया
सेबी-पंजीकृत कमोडिटी विशेषज्ञ अनुज गुप्ता के मुताबिक, चांदी ने 93 डॉलर प्रति औंस के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट दिया है। अगर यह स्तर कुछ समय तक बरकरार रहता है, तो निकट अवधि में चांदी 95 डॉलर और आगे चलकर 100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
2025 में सोने से आगे निकली चांदी
पिछले साल चांदी ने रिटर्न के मामले में सोने को पीछे छोड़ दिया था। अक्टूबर में शॉर्ट स्क्वीज और लंदन में लगातार सप्लाई की कमी के चलते चांदी की कीमतों में करीब 150 फीसदी की तेजी आई थी।
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फिलहाल बाजार की नजर अमेरिकी सेक्शन 232 जांच पर है, जिसके तहत चांदी पर टैरिफ लगने की संभावना है। इस आशंका ने अमेरिकी वेयरहाउस में सप्लाई को रोक दिया है, जिससे वैश्विक इन्वेंट्री घट गई है।
क्यों लगातार चढ़ रही है चांदी
चांदी की कीमतों में तेजी की वजह सिर्फ जियोपॉलिटिकल तनाव नहीं, बल्कि मजबूत औद्योगिक मांग और सीमित सप्लाई भी है। चांदी केवल सिक्कों या आभूषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी, ऑटोमोबाइल और मेडिकल सेक्टर में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होती है। सोने के बाद चांदी को सबसे बेहतर सुचालक माना जाता है।
कहां-कहां होता है चांदी का इस्तेमाल
चांदी का उपयोग स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सर्किट बोर्ड और सेमीकंडक्टर में होता है। सोलर पैनल के फोटोवोल्टिक सेल, मेडिकल उपकरण, बैटरियों और ऑटो उद्योग के इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों में भी इसका अहम योगदान है। इसके अलावा पेट्रोकेमिकल सेक्टर में इसे उत्प्रेरक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बढ़ती मांग के चलते आने वाले समय में चांदी की औद्योगिक खपत और बढ़ सकती है, जिससे कीमतों को और समर्थन मिलेगा।



