न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया को और आसान बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। नए फैसले के तहत अब RTE कोटे से दाखिले के लिए बच्चे का आधार कार्ड अनिवार्य नहीं रहेगा। इस बदलाव से उन हजारों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो अब तक दस्तावेजों की कमी के कारण अपने बच्चों का स्कूल में नामांकन नहीं करा पा रहे थे।
एडमिशन प्रक्रिया में क्या हुआ बदलाव
संशोधित नियमों के अनुसार, पहले जहां ऑनलाइन आवेदन के समय बच्चे और माता-पिता दोनों के आधार कार्ड जरूरी होते थे, वहीं अब बच्चे का आधार कार्ड नहीं मांगा जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी योग्य बच्चे को केवल तकनीकी या दस्तावेजी कारणों से शिक्षा से वंचित न रहना पड़े।
आधार कार्ड अब कहां होगा जरूरी
नए दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि आधार कार्ड का उपयोग केवल वित्तीय भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया में किया जाएगा। RTE के तहत निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि अब आधार से जुड़े बैंक खाते में ही ट्रांसफर की जाएगी। इसके लिए आवेदन के समय कम से कम एक अभिभावक का आधार-सीडेड बैंक खाता होना अनिवार्य होगा, लेकिन बच्चे का आधार जरूरी नहीं होगा।
सरकार की मंशा
इस फैसले पर बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि सरकार RTE अधिनियम की मूल भावना के अनुरूप वंचित और जरूरतमंद परिवारों के लिए शिक्षा को सुलभ बनाना चाहती है।
यह भी पढ़े:- भारत हिंदू राष्ट्र बनकर रहेगा, कोई ताकत नहीं रोक सकती: मोहन भागवत
उनका कहना है कि केवल दस्तावेजों के अभाव में किसी भी बच्चे को स्कूल से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।
25 फीसदी सीटों का नियम यथावत
सरकार ने यह भी साफ किया है कि RTE अधिनियम की धारा 12(1)(c) के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में कुल प्रवेश क्षमता की 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी। यह व्यवस्था एंट्री लेवल कक्षाओं—नर्सरी, प्री-प्राइमरी या कक्षा 1—पर लागू होगी। प्रत्येक जिले में दाखिले का वार्षिक लक्ष्य इसी आधार पर तय किया जाएगा।
उम्र के आधार पर पात्रता
संशोधित नियमों में बच्चों की उम्र को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं—
- 3 वर्ष या उससे अधिक और 4 वर्ष से कम: नर्सरी
- 4 वर्ष या उससे अधिक और 5 वर्ष से कम: एलकेजी
- 6 से 7 वर्ष: कक्षा 1
इन आयु मानकों के अनुसार ही ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।
सत्यापन और स्कूल आवंटन की प्रक्रिया
आवेदन के बाद दस्तावेजों का सत्यापन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी स्तर पर किया जाएगा। स्कूल आवंटन पूरी तरह ऑनलाइन लॉटरी प्रणाली से दो चरणों में होगा। पहले चरण में सत्यापित आवेदनों का डिजिटल रैंडमाइजेशन किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में अभिभावकों की पसंद और लॉटरी नंबर के आधार पर 100-100 आवेदनों के समूह में स्कूल आवंटित किए जाएंगे। अंतिम चयन सूची जिलाधिकारी की मंजूरी के बाद जारी की जाएगी।
यह बदलाव प्रदेश में शिक्षा तक समान और आसान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



