Saturday, March 28, 2026

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आसाराम पर सवाल सुनते ही धीरेंद्र शास्त्री ने दिया क्रिकेट का उदाहरण, बोले– टेस्ट मैच में टिके रहना ही असली खेल

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री उर्फ बाबा बागेश्वर इन दिनों छत्तीसगढ़ के भिलाई दौरे पर हैं, जहां वे पांच दिवसीय हनुमंत कथा का आयोजन कर रहे हैं। अपने बेबाक और रोचक बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले धीरेंद्र शास्त्री ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उनसे जेल में बंद स्वयंभू संत आसाराम बापू को लेकर सवाल किया गया, जिस पर उन्होंने गंभीर मुद्दे का जवाब अपने अलग अंदाज में दिया।

बाबाओं के पतन पर सवाल

IBC 24 चैनल को दिए इंटरव्यू में धीरेंद्र शास्त्री से पूछा गया कि कई संत और महात्मा ऊंचे मुकाम पर पहुंचने के बाद ऐसे विवादों में कैसे फंस जाते हैं, जिससे उनकी वर्षों की प्रतिष्ठा खत्म हो जाती है। इस सवाल में आसाराम बापू समेत अन्य संतों के पतन का भी जिक्र किया गया।

बोले- बड़ा बनना नहीं, बड़ा बने रहना चुनौती

इस पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि प्रसिद्धि पाने वाले व्यक्ति को, चाहे वह धर्म, राजनीति या किसी भी क्षेत्र से जुड़ा हो, खुद को बनाए रखने के लिए कुछ बातों से दूरी बनानी जरूरी होती है। उन्होंने कहा, “बड़ा बनना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन कितने समय तक आप बड़े बने रहते हैं, यही असली चुनौती है।”

क्रिकेट से समझाया सिद्धांत

धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी बात समझाने के लिए क्रिकेट का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “टेस्ट मैच में एक सिद्धांत चलता है- रन आएं या न आएं, क्रीज पर टिके रहना जरूरी होता है। इसी वजह से राहुल द्रविड़ को ‘वॉल ऑफ इंडिया’ कहा जाता था।”
उन्होंने आगे कहा कि ऊंचे पद पर पहुंचने वाले व्यक्ति को तीन चीजों से बचकर रहना चाहिए—स्त्री से जुड़ा गलत आचरण, काला धन और गंदी राजनीति। उनका कहना था कि इनसे दूरी बनाए रखने वाला व्यक्ति लंबे समय तक टिक सकता है।

‘हीरो से जीरो और जीरो से हीरो’

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि यही तीन बातें किसी को हीरो से जीरो बना सकती हैं और यदि इन पर नियंत्रण हो जाए तो जीरो से हीरो बनने का रास्ता भी खुलता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि खुद उन्हें भी हर पल इनसे दूर रहने का प्रयास करना चाहिए।

परिस्थितियां कैसे बनती हैं, कहना मुश्किल

जब उनसे पूछा गया कि जो महात्मा त्याग और संयम की शिक्षा देते हैं, वे खुद कैसे ऐसे मामलों में फंस जाते हैं, तो इस पर उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियां कैसे बनती हैं, यह कहना बेहद कठिन है। उन्होंने कहा कि यह स्वांग है, षड्यंत्र है या व्यक्ति की वृत्ति भटक जाती है—इस पर निश्चित रूप से कुछ कहना आसान नहीं है।

धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान ने एक बार फिर धार्मिक जगत और सामाजिक विमर्श में चर्चा को तेज कर दिया है।

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