न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- महज 10 साल की उम्र में देशसेवा की मिसाल पेश करने वाले सरवन सिंह को शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान जवानों की मदद करने वाले सरवन की बहादुरी और समर्पण की अब पूरे देश में सराहना हो रही है।
पाकिस्तान के साथ तनाव और सीमा पर गोलीबारी के बीच सरवन सिंह ने अपनी जान की परवाह किए बिना गांव के पास तैनात जवानों तक दूध, पानी और लस्सी पहुंचाई। सरवन का कहना है कि यह उनका खुद का फैसला था कि चाहे हालात जैसे भी हों, सैनिकों के लिए जरूरी चीजें जरूर पहुंचाई जाएं।
सरवन ने बताया कि जब ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ और सेना के जवान गांव के आसपास तैनात हुए, तब वह रोजाना दूध, लस्सी, चाय और बर्फ लेकर उनके पास जाता था। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि इस काम के लिए उन्हें राष्ट्रपति से सम्मान मिलेगा। अधिकारियों के मुताबिक, इतने खतरनाक हालात में बाहर जाने के लिए सरवन को उसके परिवार ने भी नहीं कहा था, यह पूरी तरह उसका अपना जज्बा था।
कौन हैं सरवन सिंह
कक्षा 4 में पढ़ने वाले सरवन सिंह पंजाब के फिरोजपुर जिले के ममडोट क्षेत्र के तारा वाली गांव के रहने वाले हैं। उनका गांव पाकिस्तान सीमा से महज दो किलोमीटर दूर स्थित है। मई महीने में 7वीं इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल कमांडिंग ऑफिसर मेजर जनरल रंजीत सिंह मनराल ने पहली बार सरवन के साहस की जानकारी साझा की थी।
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सरवन का कहना है कि वह बड़े होकर फौजी बनना चाहते हैं और देश की सेवा करना उनका सपना है। उनके पिता भी बेटे की इस देशभक्ति और हिम्मत पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
पंजाब के लिए गर्व का क्षण
पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सरवन सिंह को बाल पुरस्कार मिलने पर बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अद्वितीय साहस दिखाने के लिए 10 वर्षीय सरवन सिंह को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जाना पूरे पंजाब के लिए गर्व की बात है। जाखड़ ने सरवन को शुभकामनाएं देते हुए उसके देशभक्ति के जज्बे को सलाम किया।
सरवन सिंह की कहानी न सिर्फ बच्चों, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई है।



