न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- बिहार के अररिया जिले में एक दिल दहला देने वाले मामले में अदालत ने एक मां को अपनी ही 10 वर्षीय बेटी की हत्या करने का दोषी पाते हुए फांसी की सजा सुनाई है। इस मामले को अदालत ने “रेयर ऑफ द रेयरेस्ट” श्रेणी में रखते हुए कड़ी सजा सुनाई।
एडीजे-04 रवि कुमार की अदालत ने आदेश दिया कि दोषी पूनम देवी को “फांसी देकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए”।
प्रेम संबंध का राज छुपाने के लिए की गई थी बेटी की हत्या
स्पीडी ट्रायल के दौरान यह प्रमाणित हुआ कि आरोपी मां पूनम देवी को उसकी बेटी शिवानी कुमारी ने अपने प्रेमी रूपेश सिंह के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। बेटी द्वारा यह बात पिता को बताने की चेतावनी देने पर मां ने उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
अदालत ने कहा कि यह हत्या पूर्वनियोजित और अत्यधिक क्रूरता से की गई है। दोषी महिला नरपतगंज थाना क्षेत्र के रामपुर कोसकापुर वार्ड 05 की रहने वाली है।
60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
कोर्ट ने फांसी की सजा के साथ विभिन्न धाराओं में कुल 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह फैसला एसटी 582/2023 में सुनाया गया। सरकारी अभियोजक (एपीपी) प्रभा कुमारी मंडल ने अभियोजन पक्ष की ओर से तर्क रखे।
पहले बेहोश किया, फिर चाकू से हत्या—जहरीली मछली से बनी हत्या की शुरुआत
जांच में पता चला कि 10 जुलाई 2023 को पूनम देवी ने अपनी बेटी को मछली में कीटनाशक मिलाकर खिलाया, जिससे वह बेहोश हो गई। इसके बाद उसने तेज चाकू से गले और पेट पर वार करके बेटी की हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को मक्का के ढेर में छिपा दिया और बाद में खुद ही “ढूंढने” का नाटक किया।
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चिकित्सा रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि शव में डिकोलरस नामक ऑर्गेनोफॉस कीटनाशक पाया गया।
चौकीदार के बयान पर दर्ज हुई प्राथमिकी
नरपतगंज थाना कांड संख्या 380/2023 की प्राथमिकी चौकीदार भगवान कुमार पासवान के बयान पर दर्ज की गई। जांच अधिकारी ने 22 सितंबर 2024 को आरोप पत्र दाखिल किया था।
अदालत ने 1 दिसंबर 2023 को आरोप तय किए और 2 जनवरी 2024 से गवाही शुरू हुई। सभी गवाहों ने घटना की पुष्टि की, जिसके बाद अदालत ने पूनम देवी को दोषी ठहराया।



