न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- दिल्ली में लाल किले के पास हुए धमाके को एक हफ्ता बीत चुका है और जांच एजेंसियों ने अब टेरर मॉड्यूल के लगभग सभी सदस्यों की भूमिकाएं स्पष्ट कर दी हैं। इस हमले के बाद से फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी जांच के केंद्र में आ गई है। ईडी ने भी इस मामले में दखल देते हुए यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को 13 दिन की रिमांड पर लिया है। आरोप है कि सिद्दीकी ने छात्रों को फर्जी मान्यता दिखाकर 415 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।
इसी बीच एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से खुलासा किया है कि इस व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल का उद्देश्य सिर्फ आतंकी हमला करना ही था। सदस्यों के बीच जिम्मेदारियां बांटी गई थीं—किसी ने विस्फोटक बनाए, किसी ने फंड जुटाया, किसी ने भर्ती की और मॉड्यूल का एक सदस्य पाकिस्तानी आतंकी हंजुल्ला के संपर्क में भी था।
टेरर मॉड्यूल के हर सदस्य की भूमिका
डॉ. उमर उन नबी — मुख्य हमलावर
लाल किले के पास धमाका करने वाला यही था। सुसाइड अटैक की तैयारी पर उसका वीडियो भी सामने आया।विस्फोटक और बम बनाने में विशेषज्ञ। मॉड्यूल का सबसे आक्रामक और सक्रिय सदस्य।
जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश — तकनीशियन
ड्रोन और बम मॉड्यूल में तकनीकी सहायता दी। डॉ. उमर ने ही उसे टीम में शामिल किया। ड्रोन में बम लोड करने के लिए मोडिफिकेशन करता था। रॉकेट तक बनाने की कोशिश की थी।
आमिर राशिद अली — प्लानर और लॉजिस्टिक्स
दिल्ली से गिरफ्तार। हमले की योजना तैयार करने में डॉ. उमर का मुख्य सहयोगी। उमर को i20 कार उपलब्ध कराई।विस्फोटक तैयार करने में भी मदद की।
इरफान अहमद — भर्ती करने वाला मौलवी
शोपियां का मौलवी, युवाओं को बरगलाकर मॉड्यूल में भर्ती करता था। डॉक्टरों की भर्ती में अहम भूमिका। उसी ने मुजम्मिल शकील को जोड़ा। सीधे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकियों से संपर्क में था।
पाकिस्तानी आतंकी उमर बिन खत्ताब उर्फ हंजुल्ला — विदेशी लिंक
इरफान अहमद सीधे इसके संपर्क में था। यह पुष्टि करता है कि मॉड्यूल में पाकिस्तान से संचालित नेटवर्क भी सक्रिय था।
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अदील अहमद राथर — पहला पकड़ा गया और बड़े खुलासे का कारण
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सबसे पहले गिरफ्तार किया। इसकी पूछताछ से पूरा मॉड्यूल बेनकाब हुआ। इसकी जानकारी पर मुजम्मिल शकील और शाहीन सईद गिरफ्तार हुए। फरीदाबाद से 2,900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद कराने में भूमिका। हथियारों की सप्लाई की जिम्मेदारी संभालता था।
शाहीन सईद — फंडिंग और महिला विंग से कनेक्शन
अल-फलाह यूनिवर्सिटी की फैकल्टी। गरीब महिलाओं और लड़कियों को कट्टरपंथी बनाकर जमात-उल-मुमीनात (JeM की महिला शाखा) से जोड़ती थी। मॉड्यूल की फंडिंग का काम संभालती थी। हवाला से करीब 20 लाख रुपये प्राप्त किए। पैसे को लेकर डॉ. उमर से विवाद भी हुआ था। अपने भाई परवेज़ अंसारी को भी मॉड्यूल में शामिल किया।
मुजम्मिल शकील — डॉक्टर और मॉड्यूल एक्सपैंडर
अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ा डॉक्टर। इरफान अहमद ने सबसे पहले इसे मॉड्यूल में शामिल किया। इसके बाद इसने अन्य डॉक्टरों और छात्रों को जोड़ा। विस्फोटक पहुंचाने और कट्टरपंथ फैलाने दोनों में भूमिका।



