Thursday, February 12, 2026

Buy now

spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

‘क्या सभ्य समाज को इसकी इजाजत देनी चाहिए?’—सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-हसन को रद्द करने के संकेत दिए!

न्यूज डेस्क/सर्वोदय न्यूज़ :- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तलाक-ए-हसन की प्रथा को असंवैधानिक घोषित करने के संकेत दिए। न्यायालय ने पूछा कि क्या 2025 के आधुनिक समाज में ऐसी प्रथा जारी रहनी चाहिए जो महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाती हो। कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक को अवैध ठहराने के बाद अब तलाक-ए-हसन पर भी नए सिरे से विचार जरूरी है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि वह इस प्रथा को रद्द करने और मामले को पांच-न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ को भेजने पर गंभीरता से विचार कर रही है। कोर्ट ने संबंधित पक्षों से व्यापक संवैधानिक सवालों की सूची के साथ संक्षिप्त नोट देने को कहा है।

तलाक-ए-हसन क्या है?
इस प्रथा के तहत एक मुस्लिम पुरुष तीन महीने की अवधि में हर महीने एक बार “तलाक” कहकर विवाह समाप्त कर सकता है।

यह भी पढ़े :- ओवैसी ‘खानदानी नेता’, मुसलमान होना ही उनका गुनाह—बृजभूषण सिंह ने AIMIM चीफ

कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या ऐसी प्रथा, जो स्पष्ट रूप से महिलाओं के अधिकारों और गरिमा को प्रभावित करती है, आधुनिक समाज में स्वीकार्य हो सकती है।

कोर्ट का सख्त रुख
पीठ ने कहा,“यह प्रणाली बड़े पैमाने पर समाज को प्रभावित करती है। अगर इसमें घोर भेदभाव है तो न्यायालय को कदम उठाने होंगे। क्या 2025 में भी ऐसी प्रथाओं को बचाए रखना चाहिए? क्या एक महिला की गरिमा को ऐसे बनाए रखा जा सकता है?”

क्या है मामला?
पूरा मामला पत्रकार बेनजीर हीना की जनहित याचिका से जुड़ा है। उन्होंने तलाक-ए-हसन को अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 का उल्लंघन बताते हुए प्रतिबंध लगाने की मांग की है। आरोप है कि उनके पति ने दहेज देने से इनकार होने के बाद वकील के माध्यम से तलाक-ए-हसन नोटिस भेजकर एकतरफा तलाक दे दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नोट्स प्राप्त होने के बाद वह इस मामले को संविधान पीठ के पास भेजने की “वांछनीयता” पर निर्णय लेगा।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

1,388FansLike
133FollowersFollow
621SubscribersSubscribe
- Advertisement -[cricket_score]

Latest Articles