न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- भारत की बेहद मारक और सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, जिसने हाल ही में पाकिस्तान में ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान जबरदस्त विध्वंस मचाया था, अब वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस मिसाइल प्रणाली को अब दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया ने खरीदने का निर्णय लिया है। लगभग 45 करोड़ डॉलर की इस डील को लेकर अंतिम सहमति बनने वाली है, जो भारत के रक्षा निर्यात क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सभी प्रक्रियाएं पूरी, रूसी मंजूरी का इंतजार
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस मिसाइल सौदे की लगभग सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। अब सिर्फ रूस की आधिकारिक स्वीकृति शेष है, जिसके बाद जल्द ही इस डील पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।
इस वर्ष जनवरी में इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने भारत दौरा किया था, जहाँ इस सौदे पर विस्तार से बात हुई थी। इसके बाद भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के इंडोनेशिया दौरे ने भी इस डिफेंस डील की दिशा में तेजी लाई।
यह भी पढ़े:– Happy Birthday Virat Kohli: बर्थडे ब्वॉय विराट कोहली के 5 बेजोड़ वर्ल्ड रिकॉर्ड, जिन्हें
भारत इससे पहले भी फिलीपींस के साथ ब्रह्मोस सौदा कर चुका है और अब दक्षिण-पूर्व एशिया में अपने रक्षा साझेदारी को मजबूत कर रहा है।
ब्रह्मोस की मारक क्षमता: ‘फायर एंड फॉरगेट’ तकनीक
ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस के संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित की गई है। इसका नाम भारत की ‘ब्रह्मपुत्रा’ और रूस की ‘मॉस्को’ नदियों से लिया गया है। यह मिसाइल 2005 से भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल है और इसकी खासियत है:
- सुपरसोनिक रफ्तार: 8 मैक (ध्वनि की गति से 3 गुना)
- रेंज: 290 किलोमीटर तक (अपग्रेडेड संस्करण में 400+ किमी)
- लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म: जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी
- वारहेड क्षमता: 300 किलोग्राम का हाई-एक्सप्लोसिव
- तकनीक: ‘फायर एंड फॉरगेट’, यानी लॉन्च के बाद लक्ष्य तक खुद पहुंचे
ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में दिखा ब्रह्मोस का जलवा
मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने पर भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के तहत पाकिस्तानी भोलारी एयरबेस पर ब्रह्मोस मिसाइलों से हमला किया था। इस हमले में पाकिस्तान के एयरबॉर्न वॉर्निंग सिस्टम (AWACS) समेत कई हवाई क्षमताएँ नष्ट कर दी गईं। रक्षा विशेषज्ञों ने इसे ब्रह्मोस की वास्तविक क्षमता का ‘लाइव डेमो’ बताया था।
इंडोनेशिया क्यों खरीद रहा ब्रह्मोस?
इंडोनेशिया, जिसके पास दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी है, दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती दादागिरी के जवाब में अपनी नौसैनिक क्षमता को सुदृढ़ कर रहा है। नटुना द्वीप समूह पर चीनी दावों को देखते हुए जकार्ता की रणनीतिक जरूरतों में ब्रह्मोस जैसे हाई प्रिसीजन वेपन सिस्टम फिट बैठते हैं।
इंडोनेशिया इस डील के तहत शिप-लॉन्च और लैंड-बेस्ड वर्जन खरीदने की योजना बना रहा है। इस डील से न केवल इंडोनेशियाई नौसेना को शक्ति मिलेगी, बल्कि भारत के ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा अभियान को भी वैश्विक मान्यता मिलेगी।



