आंध्र प्रदेश: रेलिंग टूटते ही मच गई भगदड़, वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में 10 की मौत — सरकार ने बताई वजह

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज:- आंध्र प्रदेश के काशीबुग्गा स्थित वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में शनिवार सुबह एकादशी के अवसर पर बड़ा हादसा हो गया। सुबह करीब 11:30 बजे मंदिर में अचानक भगदड़ मच गई, जिसमें कम से कम 10 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हुए। मृतकों में अधिकांश महिलाएं बताई जा रही हैं।

कैसे मची भगदड़? सरकार ने बताई पूरी कहानी

राज्य की गृह मंत्री वी. अनीता ने बताया कि यह हादसा रेलिंग टूटने की वजह से हुआ।“मंदिर ऊँचाई पर स्थित है और श्रद्धालु पहली मंजिल की सीढ़ियों से चढ़ रहे थे। तभी रेलिंग टूट गई, जिससे लोग नीचे गिर पड़े और उनके ऊपर अन्य लोग गिरते चले गए,”— गृह मंत्री वी. अनीता| उन्होंने कहा कि यह मंदिर निजी प्रबंधन के अधीन है और धर्मस्व विभाग की देखरेख में नहीं आता।

स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट

श्रीकाकुलम के जिलाधिकारी स्वप्निल दिनकर पुंडकर ने बताया, “अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इनमें से 7 ने मौके पर और 3 ने अस्पताल में दम तोड़ा है। मृतकों में ज्यादातर महिलाएं हैं।”

लापरवाही के आरोप और अव्यवस्था उजागर

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मंदिर में भीड़ नियंत्रण के लिए कोई बैरिकेडिंग या सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। जिस हिस्से में भगदड़ हुई, वह हिस्सा अभी निर्माणाधीन था।  मंदिर में प्रवेश और निकास का रास्ता एक ही था।  भीड़ 10,000 से अधिक श्रद्धालुओं तक पहुँच गई थी। कुछ भक्तों ने निकास द्वार से अंदर घुसने की कोशिश की, जिससे अफरा-तफरी मच गई।

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जताया शोक

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा:“वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में हुई भगदड़ से मैं गहरा दुखी हूं। यह बहुत दर्दनाक है कि श्रद्धालुओं की जानें गईं। मैंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि घायलों को तत्काल और सर्वोत्तम इलाज दिया जाए।”

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उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय अधिकारी और नेता राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं और पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

बतादें कि वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर 12 एकड़ भूमि पर फैला है। लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण किया गया। मंदिर का उद्घाटन मई 2025 में हुआ था। हर शनिवार को यहां 1,500–2,000 श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, जबकि एकादशी पर यह संख्या दस गुना बढ़ जाती है।

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