Friday, February 13, 2026

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एक दिन के लिए पुलिस हटाओ- अरविंद केजरीवाल की भाजपा को चुनौती, कहा-…

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले में आयोजित किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार के प्रति किसानों में गहरा रोष है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में अहंकार बढ़ गया है और किसानों का गुस्सा अब नियंत्रण से बाहर है।

केजरीवाल ने कहा कि अगर “एक दिन के लिए पुलिस हटा दी जाए”, तो भाजपा कार्यकर्ताओं का सामना किसानों के गुस्से से करना पड़ेगा — यह बात उन्होंने अपने संबोधन में की। AAP प्रमुख ने कहा कि 30 साल से किसान भाजपा को वोट देते आए हैं, लेकिन अब वे नाराज़ हैं और उनकी सहनशक्ति समाप्त हो रही है।

केजरीवाल के आरोप — कड़ी भाषा और चुनावी बयान

केजरीवाल ने कहा कि भाजपा ने बहुत लाभ उठाया है और अब किसानों को शोषित नहीं होने दिया जाएगा। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु इस प्रकार थे:

  • उन्होंने दावा किया कि 400 से अधिक मंडियों में किसान संगठित हैं और आंदोलन जारी है।

  • भाजपा पर आरोप लगाया कि उसके समर्थक विज्ञापन और राजनीतिक फायदे के लिए काम कर रहे हैं जबकि किसानों की समस्याओं की अनदेखी हो रही है।

  • उन्होंने कहा कि भाजपा “कायर” व्यवहार कर रही है और बाहरी दबावों के आगे झुक जाती है; इस संदर्भ में उन्होंने अमेरिका के तत्कालीन निर्णयों और उनके प्रभाव का उल्लेख करते हुए केंद्र की विदेश-व्यवहार नीतियों पर भी कटाक्ष किया।

(ध्यान दें: ये बिंदु केजरीवाल के भाषण से उद्धृत/सारांशित हैं।)

राजनीतिक संदर्भ और संभावित प्रभाव

केजरीवाल के ये बयान गुजरात के राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकते हैं—विशेषकर तब जब राज्य में किसान मुद्दे और मंडियों के विवाद संवेदनशील बने हुए हैं। नेता के आक्रामक आशय और स्पष्ट शब्द चुनाव चुनावी रणनीति का हिस्सा बताए जा रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में एक ओर जहां विपक्षी दलों के तीखे बयान अक्सर जनभावनाओं को मजबूत करते हैं, वहीं प्रशासन और कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से ऐसे बयानों की निगरानी और उनकी पाबंदी की संवैधानिक सीमाएँ भी चर्चा का विषय बनती हैं।

केजरीवाल ने अपने सम्बोधन में किसानों के साथ एकजुटता का संदेश देते हुए कहा कि भाजपा की नीतियों से किसानों को आहत किया जा रहा है और अब बदलाव समय की मांग है। उनका संदेश स्पष्ट रूप से चुनावी केन्द्रित रहा और उन्होंने किसानों को संगठित रहने की अपील की।

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