न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़: – बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती द्वारा उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की सार्वजनिक मंच से प्रशंसा किए जाने के बाद, समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखा तंज कसते हुए अप्रत्यक्ष रूप से “सांठगांठ” का आरोप लगाया है।
गुरुवार को कांशीराम परिनिर्वाण दिवस पर आयोजित महारैली में मायावती ने कहा, “वर्तमान भाजपा सरकार की इस बात के लिए आभारी हूं कि उन्होंने रैली स्थल की मरम्मत और देखरेख में टिकट से इकट्ठा हुए पैसे का सही उपयोग किया।” उन्होंने सपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि, “सपा की सरकार में ये पैसा दबाकर रख दिया जाता था।”
इस बयान के बाद अखिलेश यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर बिना नाम लिए तंज कसा: “क्योंकि ‘उनकी’ अंदरूनी साँठगाँठ है जारी। इसीलिए वो हैं ज़ुल्म करने वालों के आभारी।”
राजनीतिक संकेत और संदेश
राजनीतिक गलियारों में इसे बसपा और भाजपा के बीच संभावित सॉफ्ट कॉर्नर के रूप में देखा जा रहा है। जहाँ मायावती ने कांग्रेस और सपा दोनों पर तीखा हमला बोला, वहीं भाजपा सरकार की खुले मंच पर प्रशंसा करना राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में एक रणनीतिक संकेत है।
मायावती का विपक्ष पर हमला
रैली में मायावती ने कहा:
• “कांग्रेस ने आपातकाल लगाकर संविधान का अपमान किया।”
• “सपा सरकार में कानून-व्यवस्था ध्वस्त थी और दलित-पिछड़ों पर अत्याचार होते थे।”
• “2007 में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई, लेकिन कांग्रेस, भाजपा और सपा ने मिलकर बसपा को केंद्र से दूर रखा।”
• “हमने दलितों और पिछड़ों को सत्ता की मास्टर चाबी दिलाई।”
कांशीराम स्मारक विवाद
मायावती ने दावा किया कि,“जब सपा सत्ता में थी, तब कांशीराम स्मारक को नजरअंदाज किया गया। जो स्मारक हमने बनवाए थे, उनके नाम भी बदल दिए गए।”
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मायावती का यह रुख आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए एक नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जहाँ वो कांग्रेस और सपा से दूरी बनाकर तीसरी ताकत के रूप में उभरने की कोशिश कर रही हैं। वहीं, अखिलेश का यह हमला बताता है कि सपा अब बसपा को भाजपा के साथ खड़ा मान रही है।



