न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक बार फिर स्वदेशी अपनाने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण पर ज़ोर दिया। अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच पीएम मोदी का यह बयान खास महत्व रखता है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे विदेशी चीजों की जगह मेड इन इंडिया उत्पादों को अपनाएं और हर घर व हर दुकान को स्वदेशी का प्रतीक बनाएं।
स्वदेशी से ही सशक्त होगा भारत
पीएम मोदी ने कहा:“हमें वह सामान खरीदना चाहिए, जो हमारे देश में बना हो। जिसमें हमारे युवाओं की मेहनत और पसीना हो। देश की समृद्धि का रास्ता स्वदेशी से होकर ही गुजरता है।”
उन्होंने आगे कहा कि जैसे आजादी की लड़ाई में स्वदेशी आंदोलन से ताकत मिली थी, वैसे ही आर्थिक स्वतंत्रता और विकास की राह भी स्वदेशी से ही मजबूत होगी।
अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव का संदर्भ
पीएम का यह संबोधन ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में खटास बढ़ती जा रही है।
- अमेरिका में ट्रंप सरकार के आने के बाद व्यापारिक समझौते अटक गए थे।
- अमेरिका भारतीय बाजार में डेयरी प्रोडक्ट्स को बेचना चाहता था, लेकिन भारत सरकार ने इससे इनकार कर दिया।
- नतीजतन अमेरिका ने भारत पर कुल 50% तक टैरिफ लगा दिया — 25% व्यापार डील रुकने पर और 25% रूसी तेल खरीद को लेकर।
इन हालातों में पीएम मोदी का स्वदेशी अपनाने का संदेश केवल एक विचारधारा नहीं, बल्कि रणनीतिक निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।
‘हर घर, हर दुकान बने स्वदेशी का प्रतीक’
पीएम मोदी ने लोगों से कहा: “रोजमर्रा की जिंदगी में विदेशी चीजों से मुक्ति पानी होगी। हर घर को स्वदेशी का प्रतीक बनाना है, हर दुकान को स्वदेशी से सजाना है। गर्व से कहो – मैं स्वदेशी खरीदता हूं।”
उन्होंने इसे हर भारतीय की आदत और मिजाज बनाने की अपील की।
राज्य सरकारों को भी आत्मनिर्भरता की राह पर चलने का आग्रह
प्रधानमंत्री ने सभी राज्य सरकारों से भी स्वदेशी अभियान से जुड़ने और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग व निवेश को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा: “जब केंद्र और राज्य दोनों मिलकर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ेंगे, तभी हर राज्य विकसित होगा और भारत विकसित होगा।”
GST सुधार और टैक्स कटौती से छोटे उद्योगों को राहत
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में GST रिफॉर्म्स और इनकम टैक्स स्लैब में की गई कटौती का जिक्र करते हुए कहा कि इससे छोटे और मझोले उद्योगों (MSMEs) को सीधा फायदा होगा। उन्होंने कहा: “हमारे लघु और कुटीर उद्योग भारत की आत्मनिर्भरता की रीढ़ हैं। एक समय था जब भारत में बने उत्पादों की गुणवत्ता विश्व स्तरीय मानी जाती थी। हमें उस गौरव को फिर से हासिल करना है।”



