न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ उस समय आया जब माफिया से नेता बने मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी की विधानसभा सदस्यता बहाल कर दी गई। यह फैसला ठीक उसी दिन आया, जब अब्बास ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दोबारा याचिका दाखिल की थी।
विधानसभा सचिवालय ने सोमवार शाम को आदेश जारी करते हुए कहा कि अब्बास अंसारी की सदस्यता उसी तारीख से बहाल मानी जाएगी, जब इसे रिक्त घोषित किया गया था। आदेश में संविधान के अनुच्छेद 191(1)(e) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 का हवाला दिया गया।
क्या है मामला?
2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान अब्बास अंसारी पर हेट स्पीच का आरोप लगा था। इस मामले में एमपी/एमएलए कोर्ट मऊ ने 31 मई 2025 को उन्हें दो साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई और 1 जून को सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने क्यों दी राहत?
20 अगस्त 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए सजा और दोषसिद्धि को निलंबित कर दिया। कोर्ट ने माना कि भाषण से प्रथम दृष्टया सार्वजनिक सौहार्द को प्रभावित करने का प्रमाण नहीं मिलता। साथ ही, अदालत ने कहा कि सजा से अब्बास अंसारी और उनके मतदाताओं को अपरिवर्तनीय नुकसान हुआ है।
कानूनी सलाह के बाद हुआ फैसला
हाईकोर्ट के आदेश के बाद विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा था कि मामले में कानूनी राय ली जा रही है। इसके बाद सोमवार सुबह अब्बास की हाईकोर्ट में याचिका और शाम को सचिवालय का बहाली आदेश जारी होना, इसे एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक जीत माना जा रहा है।



