न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- राजस्थान का मारवाड़ क्षेत्र अपनी कठिन जलवायु और शुष्क मौसम के लिए जाना जाता है, लेकिन जब बरसात का मौसम आता है, तो यह पशुपालकों के लिए विशेष चुनौतियाँ उत्पन्न करता है। विशेष रूप से दुधारू पशुओं की देखभाल इस दौरान बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि नमी, गंदगी और बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
डॉ. जयदीप भदोरिया(पशु चिकित्सा अधिकारी), डॉ. हेमंत कुमार, डॉ. मांगिलाल, और डॉ. वीरेंद्र कुमार द्वारा सुझाए गए कुछ विशेष उपायों के माध्यम से इस मौसम में दुधारू पशुओं की देखभाल को सही ढंग से किया जा सकता है।
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पशुओं के रहने की जगह (आश्रय) का ध्यान रखें
- मारवाड़ क्षेत्र में बरसात के दौरान कीचड़, गंदगी और अत्यधिक नमी की समस्या होती है, जो पशुओं की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। सही आश्रय का निर्माण, पशुओं की रक्षा के लिए आवश्यक है।
- छांव और सुरक्षित स्थान: पशुओं को ठंड और बारिश से बचाने के लिए एक मजबूत और सूखा शेड बनाना आवश्यक है। शेड का निर्माण इस प्रकार करें कि पानी जमा न हो।
- कीचड़ से बचाव: बाड़े की ऊंचाई बढ़ाकर और जल निकासी की उचित व्यवस्था करके कीचड़ से बचाव सुनिश्चित करें।
- हवादारी: बाड़े में ताजे वायू का प्रवाह बनाए रखें ताकि नमी और मच्छरों से बचाव हो सके।
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पशुओं की सफाई और स्वच्छता
- बरसात के मौसम में कीचड़, गंदगी और बेक्टेरिया के फैलने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए पशुओं की नियमित सफाई और उनके बाड़े की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
- पशुओं की सफाई: गंदगी, कीचड़ और फंगस से बचने के लिए नियमित रूप से पशुओं की सफाई करें।
- स्वच्छता बनाए रखें: पशुओं के बाड़े और आसपास की जगह को नियमित रूप से साफ रखें। मल-मूत्र को तुरंत हटाना चाहिए ताकि बैक्टीरिया के फैलने से बचा जा सके।

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उचित आहार और पोषण
- बरसात के मौसम में घास में नमी और पोषण की कमी हो सकती है, जिससे दूध उत्पादन पर असर पड़ सकता है। उचित आहार देने से पशुओं की सेहत बनाए रखी जा सकती है।
- हरे चारे का उपयोग: ताजे, सूखे और पोषक तत्वों से भरपूर हरे चारे का उपयोग करें। चारे को गीला होने से बचाएं।
- सूखा चारा और पोषण: दुधारू पशुओं को सूखा चारा और उच्च गुणवत्ता वाले पोषण supplements दें।
- स्वच्छ पानी: पशुओं को स्वच्छ और ताजे पानी की आपूर्ति करें, क्योंकि गंदा पानी विभिन्न बीमारियों का कारण बन सकता है।
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बीमारियों से बचाव: टीकाकरण और रोग नियंत्रण
बरसात के मौसम में कीचड़ और नमी के कारण कई संक्रमण और बीमारियाँ फैल सकती हैं। इन्हें नियंत्रित करने के लिए सही समय पर टीकाकरण और रोग नियंत्रण की आवश्यकता होती है।
टीकाकरण: पशुओं का टीकाकरण समय पर कराएं, जैसे: लंपी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease), होडसोट स्किन डिजीज (HS), एंटरोटॉक्सेमिया (Enterotoxemia), पशु बुखार (BQ),फुट एंड माउथ डिजीज (FMD), ये बीमारियाँ दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं, इसलिए इनका उचित टीकाकरण बहुत जरूरी है। कीटों और परजीवियों से बचाव: मच्छर, flies और अन्य कीटों से बचने के लिए कीटनाशकों का उपयोग करें।

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मानसिक तनाव और आराम
- बरसात के मौसम में पशुओं को ठंड और नमी से मानसिक तनाव हो सकता है, जो उनके स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर असर डालता है। उन्हें आरामदायक और तनावमुक्त वातावरण देने से यह स्थिति सुधारी जा सकती है।
- आरामदायक वातावरण: पशुओं के लिए आरामदायक और शांत वातावरण सुनिश्चित करें ताकि वे मानसिक तनाव से बच सकें।
- मनोबल बढ़ाने के उपाय: नियमित रूप से पशुओं को सहलाएं और उनका ध्यान रखें, ताकि उनका मनोबल बना रहे।
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पैरों और पंजों की देखभाल
- बरसात के मौसम में पैरों में गंदगी और कीचड़ जमा हो सकता है, जिससे पैरों की सूजन और इंफेक्शन हो सकते हैं।
- पैरों की सफाई: पशुओं के पैरों की सफाई और सुखाना आवश्यक है। पैरों में कीचड़ और गंदगी जमा होने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
- पंजों की देखभाल: विशेष रूप से गायों और भैंसों के पंजों की देखभाल करें और उन्हें संक्रमण से बचाएं।
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बीमारियों के लक्षण और उपचार
- बरसात में कुछ सामान्य बीमारियाँ अधिक फैल सकती हैं, जैसे बुखार, दस्त, खांसी, और सर्दी। इनकी पहचान जल्दी से करना और उपचार देना आवश्यक है।
- बीमारी के लक्षण: यदि पशु में बुखार, दस्त, खांसी, कमजोरी या अन्य कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
- जल्दी उपचार: जब भी कोई बीमारी के लक्षण दिखें, तुरंत उपचार कराना चाहिए। इससे पशु जल्दी ठीक होते हैं और दूध उत्पादन में कमी नहीं आती।



