गांठदार त्वचा रोग (Lumpy Skin Disease) – एक गंभीर पशु रोग, जानिए लक्षण, बचाव और इलाज

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- गांठदार त्वचा रोग (Lumpy Skin Disease – LSD) एक विषाणुजनित (viral) बीमारी है जो मुख्यतः गायों और भैंसों को प्रभावित करती है। यह रोग Capripox virus के कारण होता है और बहुत तेजी से फैलता है। यह रोग आर्थिक दृष्टि से अत्यंत नुकसानदायक है क्योंकि इससे दूध उत्पादन, प्रजनन क्षमता और चमड़े की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है। यह रोग खासतौर पर गर्मी और बरसात के मौसम में अधिक देखने को मिलता है।डॉ. हेमंत तिवारी (पशु चिकित्सा विशेषज्ञ) के अनुसार –

रोग का कारण –गांठदार त्वचा रोग का मुख्य कारण Capripoxvirus होता है। यह वायरस संक्रमित पशु के संपर्क, खून चूसने वाले कीट (मच्छर, मक्खी, टिक्स आदि), और दूषित उपकरणों या वस्तुओं के माध्यम से फैलता है।

लक्षण (Symptoms)-

  • शरीर पर गोल और कठोर गांठों का बनना (विशेषकर गर्दन, छाती, पीठ, और पैरों पर)
  • तेज बुखार (106°F तक)
  • भूख कम हो जाना
  • दूध उत्पादन में गिरावट
  • आंखों और नाक से स्राव (discharge)
  • लार का अत्यधिक निकलना
  • गांठों में घाव बन जाना और पस भरना
  • शरीर में कमजोरी और चलने में कठिनाई
  • कभी-कभी बाँझपन या गर्भपात

रोग का फैलाव (Transmission)

यह रोग संक्रमित पशु से सीधे संपर्क या कीटों के माध्यम से तेजी से फैलता है। एक बार यदि किसी गाँव या फार्म में यह रोग प्रवेश कर जाए तो सभी पशु जोखिम में आ जाते हैं।

नुकसान (Economic Impact)

  • दूध उत्पादन में 30-50% तक गिरावट
  • चमड़े की गुणवत्ता में गिरावट
  • प्रजनन संबंधी समस्याएँ
  • पशु की मृत्यु भी हो सकती है
  • इलाज एवं नियंत्रण पर अतिरिक्त खर्च

बचाव (Prevention)

  1. टीकाकरण (Vaccination):
    LSD से बचाव के लिए Capripox वायरस का टीका लगाया जाना चाहिए। भारत में अब LSD-specific vaccine (Goat Pox vaccine या Lumpi-ProVac) उपलब्ध है जो असरदार पाया गया है।
  2. कीट नियंत्रण (Vector Control):
  • कीटों से बचाव के लिए पशु शेड में नियमित छिड़काव करें
  • मच्छरदानी या रिपेलेंट का उपयोग करें
  • टिक्स, मक्खी आदि से पशु को बचाएं
  1. संक्रमित पशुओं को अलग करना:
    बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें ताकि संक्रमण न फैले।
  2. स्वच्छता बनाए रखना:
  • पशु शेड को स्वच्छ और सूखा रखें
  • बर्तन, उपकरण और पशु के संपर्क वाली वस्तुओं को कीटाणुरहित करें

इलाज (Treatment)

LSD का कोई विशेष इलाज नहीं है क्योंकि यह वायरल रोग है, लेकिन लक्षणों के आधार पर supportive इलाज दिया जाता है:

  1. एंटीबायोटिक्स:
    दूसरे बैक्टीरियल संक्रमण से बचाव के लिए जैसे कि Oxytetracycline, Enrofloxacin आदि।
  2. बुखार व दर्द कम करने की दवाएं:
    जैसे Meloxicam, Paracetamol।
  3. मलहम या एंटीसेप्टिक घाव पर:
    गांठों पर घाव हो जाने पर Povidone iodine का प्रयोग करें।
  4. मल्टीविटामिन सपोर्ट:
    इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए मल्टीविटामिन और मिनरल सप्लीमेंट दें।
  5. तरल पदार्थ:
    पशु को निर्जलीकरण से बचाने के लिए ग्लूकोज़ या ORS दिया जा सकता है।
  6. गंभीर मामलों में डॉक्टर की देखरेख में IV fluids या अन्य उपचार जरूरी हो सकता है।

नियंत्रण और सरकारी प्रयास

भारत सरकार और राज्य पशुपालन विभाग LSD के लिए टीकाकरण अभियान चला रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की निगरानी, टीकाकरण और उपचार की व्यवस्था की जा रही है।

गांठदार त्वचा रोग एक तेजी से फैलने वाला और आर्थिक रूप से नुकसानदायक रोग है, लेकिन समय पर पहचान, रोकथाम और लक्षण आधारित इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। पशुपालकों को चाहिए कि वे समय-समय पर अपने पशुओं का टीकाकरण कराएं और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

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